इस स्थिति को देखते हुए बिजली विभाग ने उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए एक नया समायोजन फार्मूला लागू किया है। इस नए सिस्टम का मकसद यह है कि उपभोक्ताओं पर एकमुश्त बकाया का बोझ न पड़े और वे धीरे-धीरे अपना भुगतान कर सकें।
कैसे काम करेगा नया फार्मूला
नए नियम के अनुसार, अब उपभोक्ता जब भी रिचार्ज कराएंगे, उसका एक हिस्सा बकाया राशि में समायोजित किया जाएगा। अगर किसी उपभोक्ता का बकाया 10 हजार रुपये तक है, तो हर रिचार्ज का 10% बकाया में समायोजित होगा।
10 हजार से 15 हजार रुपये के बकाया पर 15% कटौती होगी।
वहीं 15 हजार से 20 हजार रुपये के बीच बकाया होने पर 25% राशि समायोजित की जाएगी।
उदाहरण के तौर पर, यदि किसी उपभोक्ता का कुल बकाया 10 हजार रुपये है और वह 5 हजार रुपये का रिचार्ज करता है, तो उसमें से 4 हजार रुपये मीटर में जुड़ेंगे और 1 हजार रुपये पुराने बकाया में समायोजित हो जाएंगे।
उपभोक्ताओं को मिली बड़ी राहत
इस नई व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत यह है कि अब उपभोक्ताओं को पूरा बकाया एक साथ नहीं चुकाना पड़ेगा। हर रिचार्ज के साथ थोड़ी-थोड़ी रकम कटती रहेगी, जिससे आर्थिक दबाव कम होगा और बिजली सेवा भी जारी रह सकेगी।
निगेटिव बैलेंस पर भी राहत
बिजली विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी उपभोक्ता का बैलेंस निगेटिव हो जाता है, तो 50% भुगतान करने पर तीन दिनों के भीतर कनेक्शन फिर से जोड़ दिया जाएगा। हालांकि यह सुविधा केवल एक बार के लिए ही उपलब्ध होगी। यदि तय समय में पूरा रिचार्ज नहीं किया गया, तो कनेक्शन दोबारा काटा जा सकता है।
उपभोक्ता संगठनों की मांग
उपभोक्ता संगठनों ने इस व्यवस्था में और सुधार की मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि भुगतान के बाद कनेक्शन जल्द से जल्द जोड़ा जाना चाहिए और यदि इसमें देरी होती है तो उपभोक्ताओं को मुआवजा मिलना चाहिए। इससे व्यवस्था और अधिक पारदर्शी व उपभोक्ता हितैषी बन सकती है।

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