दरअसल, वर्ष 2012 में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत प्रदेश के कई जिलों में एक्स-रे टेक्नीशियनों की संविदा पर नियुक्ति की गई थी। उस समय सेवा शर्तों में साफ उल्लेख किया गया था कि जैसे ही इस पद पर नियमित नियुक्ति होगी, संविदा कर्मियों की सेवाएं स्वतः समाप्त हो जाएंगी। लेकिन व्यवहार में ऐसा नहीं हुआ और वर्षों तक एक ही पद पर दो-दो कर्मचारी कार्य करते रहे।
शिकायत के बाद खुली पोल
मामला तब उजागर हुआ जब इस व्यवस्था को लेकर शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत में स्पष्ट उदाहरणों के साथ बताया गया कि कई चिकित्सा इकाइयों में एक ही पद पर नियमित और संविदा दोनों कर्मचारियों को वेतन दिया जा रहा है। इसके बाद विभागीय स्तर पर हड़कंप मच गया।
अधिकारियों ने मांगी रिपोर्ट
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए महानिदेशक स्तर से संबंधित जिलों के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (सीएमओ) से तत्काल रिपोर्ट तलब की गई है। उन्हें निर्देश दिया गया है कि इस पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रिपोर्ट शीघ्र प्रस्तुत करें।
इन जिलों में सीधा असर
अंबेडकर नगर, अयोध्या, बाराबंकी, बांदा, हमीरपुर, हरदोई, झांसी, कौशांबी, लखीमपुर खीरी, रायबरेली और औरैया सहित कई जिलों में इस आदेश का असर देखने को मिल रहा है। कुछ जिलों में तो संविदा कर्मचारियों को हटाने की कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है।

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