वहीं, दिसंबर 2025 में हुए 23वें भारत-रूस शिखर सम्मेलन के तहत दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को $100 बिलियन तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा था। नई बैठक में इस रोडमैप की प्रगति की समीक्षा की गई। साथ ही रूस ने न्यूक्लियर एनर्जी में सहयोग बढ़ाने की दिशा में भी भारत के साथ कदम बढ़ाने की बात कही।
ऊर्जा सहयोग पर जोर
बैठकों में ऊर्जा सहयोग सबसे अहम विषय रहा। रूसी कंपनियों ने स्पष्ट किया कि उनके पास भारत को कच्चे तेल और LNG की निरंतर और बढ़ी हुई सप्लाई देने की क्षमता है। पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष और Strait of Hormuz में सप्लाई बाधा की आशंका के बीच यह प्रस्ताव भारत के लिए स्थिर और भरोसेमंद ऊर्जा स्रोत का विकल्प साबित हो सकता है।
व्यापार, निवेश और औद्योगिक सहयोग
ऊर्जा के अलावा दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार, औद्योगिक सहयोग और निवेश के अवसर बढ़ाने पर भी चर्चा की। रूस ने खाद सप्लाई में प्रगति का जिक्र करते हुए बताया कि 2025 के अंत तक भारत को खाद आपूर्ति में 40% बढ़ोतरी दर्ज हुई। इसके साथ ही टेक्नोलॉजी, इनोवेशन, कनेक्टिविटी, मोबिलिटी और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर भी बातचीत हुई।

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