DRDO की अगुवाई में प्रोजेक्ट
आपको बता दें की इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट पर Defence Research and Development Organisation (DRDO) काम कर रही है। RPSA का उद्देश्य केवल निगरानी करना नहीं, बल्कि सीधे हमले करने में सक्षम एक मल्टी-रोल स्ट्राइक ड्रोन तैयार करना है।
ड्रोन की बड़ी ताकत क्या?
RPSA एक मल्टी-रोल स्ट्राइक ड्रोन होगा, इसमें अस्त्र मिसाइल लगी होगी, जो लंबी दूरी से दुश्मन के विमानों और ड्रोन को मार सकती है। यह पहली बार होगा जब किसी ड्रोन पर एयर-टू-एयर मिसाइल इस्तेमाल की जाएगी। इस ड्रोन में जमीन पर हमला करने वाले आधुनिक हथियार भी शामिल होंगे।
युद्ध संचालन के लिए तैयार
आपको बता दें की इस ड्रोन को नेटवर्क-आधारित युद्ध रणनीति के लिए तैयार किया जा रहा है। इसे Sukhoi Su-30MKI, AMCA स्टेल्थ फाइटर और Ghatak UCAV जैसे अन्य प्लेटफॉर्म के साथ ऑपरेशन किया जा सकेगा। इसमें स्वदेशी एवियोनिक्स, डेटा लिंक और मिशन सिस्टम का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे सबसे बड़ा लाभ ये होगा की भारत को किसी अन्य विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम होगी। इससे रखरखाव और अपग्रेड करना भी आसान होगा।
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