बिहार में शिक्षकों के लिए नया फरमान, ट्रेनिंग मई से शुरू

पटना। बिहार सरकार ने राज्य के सरकारी विद्यालयों में पढ़ा रहे शिक्षकों की कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इसके तहत इस वर्ष भी सभी शिक्षकों के लिए सेवाकालीन प्रशिक्षण अनिवार्य किया जाएगा। इसका उद्देश्य शिक्षण व्यवस्था को अधिक प्रभावी, व्यवहारिक और छात्रों की जरूरतों के अनुरूप बनाना है।

तीन लाख से अधिक शिक्षकों को मिलेगा प्रशिक्षण

शिक्षा विभाग ने राज्य के लगभग साढ़े तीन लाख शिक्षकों को इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल करने की योजना बनाई है। इसके लिए व्यापक तैयारी शुरू कर दी गई है। राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) को प्रशिक्षण के लिए विस्तृत मॉड्यूल तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है, ताकि एक समान और गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण सुनिश्चित किया जा सके।

मई से शुरू होगा जिला स्तरीय प्रशिक्षण

नए कार्यक्रम के तहत मई के पहले सप्ताह से जिला स्तर पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण सत्र शुरू किए जाएंगे। यह प्रशिक्षण DIET के माध्यम से आयोजित होगा और हर जिले में अलग-अलग समय-सारिणी के अनुसार संचालित किया जाएगा। सरकार ने यह भी निर्देश दिया है कि किसी भी विद्यालय से एक साथ बड़ी संख्या में शिक्षकों को प्रशिक्षण के लिए न बुलाया जाए, ताकि स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित न हो और शैक्षणिक गतिविधियां सुचारु रूप से चलती रहें।

कक्षा आधारित शिक्षण पर रहेगा फोकस

प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य केवल सैद्धांतिक ज्ञान देना नहीं है, बल्कि शिक्षकों को कक्षा में लागू होने वाली व्यावहारिक शिक्षण विधियों से जोड़ना है। शुरुआती चरण में यह कार्यक्रम शैक्षणिक सत्र 2026-27 में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। पहले चरण में कक्षा 1 और 2 के शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिसके बाद कक्षा 3 से 5 तक के शिक्षकों को शामिल किया जाएगा।

शिक्षा सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम बिहार की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। इससे न केवल शिक्षकों की क्षमता में सुधार होगा, बल्कि छात्रों को भी बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलने की उम्मीद बढ़ेगी।

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