पटना। बिहार में नई सरकार के गठन के बाद कानून-व्यवस्था को लेकर सख्ती लगातार बढ़ती दिख रही है। इसी क्रम में राज्य के कई जिलों की जेलों में एक साथ बड़े पैमाने पर औचक छापेमारी की गई। इस कार्रवाई से जेल प्रशासन से लेकर बंदियों तक में हड़कंप मच गया। सरकार का उद्देश्य जेलों के भीतर चल रही अवैध गतिविधियों और नेटवर्क पर सख्त नियंत्रण स्थापित करना बताया जा रहा है।
एक साथ कई जिलों में चला 'ऑपरेशन क्लीन'
आपको बता दें की बिहार में आधा दर्जन से अधिक जिलों में 'ऑपरेशन क्लीन' चलाया गया। भागलपुर, मोतिहारी, मुजफ्फरपुर, बेतिया, सीतामढ़ी और औरंगाबाद की जेलों में एक साथ तलाशी अभियान शुरू किया गया। डीएम और एसपी खुद मौके पर मौजूद रहे और पूरे ऑपरेशन की निगरानी की।
सीतामढ़ी और औरंगाबाद में मिली संदिग्ध चीजें
सीतामढ़ी जेल में छापेमारी के दौरान संदिग्ध कागजात मिले, जिनमें मोबाइल नंबर और आपत्तिजनक जानकारी दर्ज थी। वहीं औरंगाबाद जेल से पिलास, पेचकस और लोहे के टुकड़े जैसी वस्तुएं बरामद हुईं, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रशासन ने तुरंत जांच के आदेश दिए हैं।
मुजफ्फरपुर में सबसे बड़ा सर्च ऑपरेशन
मुजफ्फरपुर के शहीद खुदीराम बोस केंद्रीय कारा में सबसे बड़ा तलाशी अभियान देखने को मिला। करीब 200 जवानों की टीम ने चार घंटे तक जेल के हर हिस्से की जांच की। हालांकि इस दौरान कोई संदिग्ध वस्तु बरामद नहीं हुई, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कड़ी निगरानी जारी रखने के निर्देश दिए गए।
भागलपुर से शुरू हुई सख्त कार्रवाई
भागलपुर स्थित शहीद जुब्बा सहनी केंद्रीय कारा से इस अभियान की शुरुआत हुई। यहां प्रशासन ने जेल की सुरक्षा व्यवस्था, बंदियों की स्थिति और अंदर की गतिविधियों की बारीकी से जांच की। अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के निर्देश दिए।
मोतिहारी और बेतिया में सख्त जांच
मोतिहारी सेंट्रल जेल और बेतिया मंडल कारा में भी डीएम और एसपी की टीम ने औचक निरीक्षण किया। सभी वार्डों और बैरकों की गहन तलाशी ली गई। हालांकि यहां कोई आपत्तिजनक सामान नहीं मिला, लेकिन जेल प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए।
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