भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ा, देशवासियों के लिए 3 बड़ी खुशखबरी

नई दिल्ली। वैश्विक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत की अर्थव्यवस्था से एक सकारात्मक संकेत सामने आया है। अप्रैल 2026 के दौरान देश के विदेशी मुद्रा भंडार में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हालात पूरी तरह स्थिर नहीं होने के बावजूद यह वृद्धि भारत की आर्थिक मजबूती को दर्शाती है।

RBI द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार 17 अप्रैल 2026 को समाप्त सप्ताह में देश के विदेशी मुद्रा भंडार में 2.36 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई। यह लगातार तीसरा सप्ताह है जब भंडार में इजाफा हुआ है। इससे पहले भी एक सप्ताह में 3.82 अरब डॉलर की वृद्धि दर्ज की गई थी। कुल मिलाकर अब भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 703.308 अरब डॉलर तक पहुंच गया है

विदेशी मुद्रा में मजबूती

विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा विदेशी मुद्रा आस्तियां (FCA) होती हैं। बीते सप्ताह इसमें 1.48 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई, जिससे इसका कुल स्तर 557.463 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इसमें डॉलर के अलावा यूरो, पाउंड और येन जैसी प्रमुख मुद्राओं के उतार-चढ़ाव का भी असर शामिल होता है।

सोने के भंडार में भी इजाफा

देश के गोल्ड रिजर्व में भी बढ़ोतरी देखी गई है। समीक्षाधीन सप्ताह में सोने के भंडार का मूल्य 790 मिलियन डॉलर बढ़ा है। इसके साथ कुल वैल्यू 122.133 अरब डॉलर हो गई है। वर्तमान में भारत के पास 880 टन से अधिक सोना है, जो कुल विदेशी मुद्रा भंडार का लगभग 15 प्रतिशत हिस्सा बनता है।

SDR और IMF रिजर्व में हल्की बढ़त

विशेष आहरण अधिकार (SDR) में भी हल्की वृद्धि दर्ज की गई है। यह 78 मिलियन डॉलर बढ़कर 18.841 अरब डॉलर हो गया है। वहीं, IMF के पास रखे भारत के रिजर्व में भी मामूली बढ़ोतरी हुई है, जो अब 4.870 अरब डॉलर तक पहुंच गया है।

आम जनता के लिए क्या मायने?

विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि का सीधा असर देश की आर्थिक स्थिरता पर पड़ता है। इससे रुपये को मजबूती मिलती है, आयात खर्च नियंत्रित रहता है और अंतरराष्ट्रीय संकटों से निपटने की क्षमता बढ़ती है। कुल मिलाकर, यह बढ़ोतरी देश की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने वाली मानी जा रही है।

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