नाइट फ्रैंक की वेल्थ रिपोर्ट 2026 के अनुसार, भारत में अल्ट्रा-हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स की संख्या बढ़कर करीब 19,877 हो गई है। इस श्रेणी में वे लोग शामिल होते हैं जिनकी कुल संपत्ति 30 मिलियन डॉलर (लगभग 283 करोड़ रुपये) या उससे अधिक होती है।
5 साल में तेज उछाल
पिछले पांच वर्षों में भारत के अल्ट्रा-रिच लोगों की संख्या में 63% से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह वृद्धि दर दुनिया के कई बड़े देशों की तुलना में अधिक है। इसी के चलते भारत वैश्विक रैंकिंग में ऊपर चढ़ते हुए छठे स्थान पर पहुंच गया है और अब वैश्विक अल्ट्रा-रिच आबादी में उसकी हिस्सेदारी भी बढ़कर करीब 2.8% हो गई है।
क्यों बढ़ रही है अमीरी?
जानकारों का मानना है कि भारत की आर्थिक संरचना तेजी से बदल रही है। उद्यमिता को बढ़ावा, डिजिटल इकोनॉमी का विस्तार, मजबूत पूंजी बाजार और निवेश के बढ़ते अवसर इस बदलाव के प्रमुख कारण हैं। शेयर बाजार में तेजी और निजी निवेश के बढ़ते प्रवाह ने भी संपत्ति निर्माण को गति दी है।
स्टार्टअप और IPO का बड़ा रोल
देश का स्टार्टअप इकोसिस्टम भी इस बदलाव में अहम भूमिका निभा रहा है। यूनिकॉर्न कंपनियों का बढ़ना, IPO के जरिए पूंजी जुटाना और ग्लोबल स्तर पर भारतीय कंपनियों की मौजूदगी ने पहली पीढ़ी के नए अमीरों की संख्या बढ़ाई है।
वैश्विक तुलना में भारत की स्थिति
हालांकि अभी भी अमेरिका और चीन जैसे देशों में अल्ट्रा-रिच लोगों की संख्या भारत से काफी अधिक है, लेकिन वृद्धि दर के मामले में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। यही वजह है कि आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक संपन्नता के नक्शे पर और मजबूत स्थिति बना सकता है।

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