दरअसल, केंद्र सरकार के ताजा बयान से साफ है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद भारत में खाद की कोई कमी नहीं है। किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध होंगे और उन्हें किसी तरह की घबराहट में खरीदारी करने की जरूरत नहीं है।
रबी के आंकड़ों से मिला भरोसा
रबी सीजन 2025-26 के आंकड़ों के आधार पर सरकार का कहना है कि यूरिया, डीएपी, एमओपी, एनपीके और एसएसपी जैसे प्रमुख उर्वरकों की उपलब्धता मांग से अधिक रही। यही रुझान मौजूदा वित्त वर्ष में भी जारी है, जिससे खरीफ सीजन से पहले स्थिति मजबूत बनी हुई है।
खरीफ 2026 के लिए मजबूत तैयारी
सरकार ने बताया कि खरीफ 2026 के लिए अनुमानित जरूरत का करीब 46% हिस्सा पहले से ही शुरुआती स्टॉक के रूप में उपलब्ध है। यह सामान्य स्तर (करीब 33%) से काफी ज्यादा है, जो बेहतर तैयारी का संकेत देता है। खरीफ फसलों की बुवाई मानसून के साथ जून से शुरू होती है, ऐसे में समय रहते पर्याप्त स्टॉक होना किसानों के लिए राहत की बात है।
उर्वरकों की उपलब्धता बनाम जरूरत
चालू वित्त वर्ष के शुरुआती दिनों के आंकड़े बताते हैं कि उपलब्धता और मांग के बीच बड़ा अंतर है:
यूरिया: 69.33 लाख टन उपलब्ध, जरूरत 18.17 लाख टन
डीएपी: 22.78 लाख टन उपलब्ध, जरूरत 5.90 लाख टन
एमओपी: 8.32 लाख टन उपलब्ध, जरूरत 1.73 लाख टन
एनपीके: 52.75 लाख टन उपलब्ध, जरूरत 7.46 लाख टन
एसएसपी: 25.60 लाख टन उपलब्ध, जरूरत 3.30 लाख टन
इन आंकड़ों से साफ है कि देश में खाद का पर्याप्त भंडार मौजूद है।

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