लैब में होगी तकनीकी जांच
शनिवार को चयनित स्मार्ट मीटरों को विभागीय प्रयोगशाला भेजा गया, जहां जांच समिति की मौजूदगी में इनके हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर की बारीकी से जांच की जाएगी। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब कई जिलों में स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं।
जांच की निष्पक्षता पर सवाल
हालांकि, राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा का कहना है कि विभागीय लैब में जांच की निष्पक्षता सुनिश्चित करना जरूरी है। उन्होंने आशंका जताई कि मीटर बनाने वाली कंपनियां जांच को प्रभावित करने की कोशिश कर सकती हैं।
पारदर्शिता की मांग तेज
उपभोक्ता संगठनों ने पावर कॉरपोरेशन से यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने से पहले किन-किन स्तरों पर परीक्षण किया गया था और उनकी गुणवत्ता का आकलन कैसे किया गया। साथ ही यह भी मांग उठी है कि कंपोनेंट्स के स्रोत और मानकों की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।
सड़कों पर उतरे उपभोक्ता
स्मार्ट मीटर के खिलाफ कई जिलों में विरोध प्रदर्शन जारी हैं, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल हो रही हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि उन्हें प्रीपेड और पोस्टपेड मीटर के बीच चुनाव का अधिकार मिलना चाहिए, जैसा कि केंद्र के नियमों में प्रावधान है।

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