1. न्यूनतम पेंशन को बढ़ाने की मांग
वर्तमान में 7वें वेतन आयोग के तहत केंद्रीय कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक पेंशन ₹9,000 प्रति माह निर्धारित है। पेंशनर्स संगठनों का कहना है कि मौजूदा महंगाई और जीवन-यापन की लागत को देखते हुए यह राशि पर्याप्त नहीं है। इसी वजह से आयोग के समक्ष न्यूनतम पेंशन को ₹20,500 से ₹25,740 प्रति माह तक बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके साथ ही यह मांग भी की गई है कि पूर्ण पेंशन की गणना अंतिम आहरित वेतन के 50 प्रतिशत की बजाय 67 प्रतिशत के आधार पर की जाए।
2. 80 वर्ष नहीं, 65 वर्ष से मिले अतिरिक्त पेंशन का लाभ
मौजूदा नियमों के अनुसार 80 वर्ष की आयु पूरी करने पर 20 प्रतिशत अतिरिक्त पेंशन दी जाती है, जबकि इसके बाद उम्र बढ़ने के साथ अतिरिक्त प्रतिशत बढ़ता है। पेंशनर्स संगठनों का तर्क है कि स्वास्थ्य संबंधी खर्च 65 वर्ष के बाद ही तेजी से बढ़ने लगते हैं। इसलिए उन्होंने अतिरिक्त पेंशन की शुरुआत 65 वर्ष से करने का प्रस्ताव दिया है। सुझाव के अनुसार-
65 वर्ष: अंतिम वेतन का 70% पेंशन
70 वर्ष: अंतिम वेतन का 75%
90 वर्ष और उससे अधिक: 100% वेतन के बराबर पेंशन।
3. कम्यूटेशन बहाली की अवधि 15 वर्ष से घटाकर 10-12 वर्ष करने की मांग
सेवानिवृत्ति के समय कर्मचारी अपनी पेंशन का एक हिस्सा एकमुश्त राशि के रूप में ले सकते हैं। वर्तमान नियमों के अनुसार पूरी पेंशन बहाल होने में 15 वर्ष लगते हैं। रेलवे सीनियर सिटीजंस वेलफेयर सोसाइटी (RSCWS) सहित कई संगठनों ने यह अवधि घटाकर 10 से 12 वर्ष करने की मांग की है। उनका कहना है कि निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद पेंशनर्स को जल्दी पूर्ण पेंशन मिलने से आर्थिक राहत मिलेगी।
4. पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली और फैमिली पेंशन बढ़ाने की मांग
1 जनवरी 2004 के बाद नियुक्त कर्मचारियों पर लागू राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) और यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) की समीक्षा की मांग भी प्रमुख मुद्दों में शामिल है। कर्मचारी संगठन चाहते हैं कि पुरानी पेंशन योजना (OPS) को फिर से लागू करने पर गंभीरता से विचार किया जाए। इसके अलावा वर्तमान में पारिवारिक पेंशन सामान्यतः नोशनल पे के 30 प्रतिशत के आधार पर निर्धारित होती है। पेंशनर्स संगठनों ने इसे बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने की मांग रखी है, ताकि कर्मचारी की मृत्यु के बाद परिवार को बेहतर आर्थिक सहायता मिल सके।
5. मेडिकल भत्ता ₹1,000 से बढ़ाकर ₹3,000 और ग्रेच्युटी सीमा बढ़ाने की मांग
जो पेंशनर्स CGHS की सुविधा से बाहर रहते हैं, उन्हें वर्तमान में ₹1,000 प्रति माह फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस (FMA) दिया जाता है। पेंशनर्स संगठनों का कहना है कि दवाइयों और इलाज का खर्च काफी बढ़ चुका है। इसलिए FMA को बढ़ाकर ₹3,000 प्रति माह किया जाए। इसके साथ ही रिटायरमेंट-कम-डेथ ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा, जो वर्तमान में ₹25 लाख तक है, उसे बढ़ाकर ₹50 लाख से ₹75 लाख किए जाने की भी मांग उठाई गई है।
अभी फैसला नहीं, आयोग की सिफारिशों का इंतजार
फिलहाल ये सभी मांगें कर्मचारी और पेंशनर्स संगठनों की ओर से 8वें वेतन आयोग के समक्ष रखे गए प्रस्ताव हैं। इन पर अंतिम निर्णय आयोग की सिफारिशों और केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद ही होगा। ऐसे में देशभर के लाखों पेंशनभोगी अब इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि उनकी मांगों में से किन प्रस्तावों को सरकार स्वीकार करती है।

0 comments:
Post a Comment