भारत-जापान की बड़ी तैयारी! डॉलर की छुट्टी तय, ट्रंप को टेंशन

नई दिल्ली। भारत और जापान के बीच आर्थिक सहयोग को लेकर एक बड़ा कदम सामने आ रहा है। दोनों देश व्यापारिक लेनदेन में अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने और स्थानीय मुद्रा के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत और जापान लोकल करेंसी सेटलमेंट फ्रेमवर्क पर काम कर रहे हैं। इसके लागू होने के बाद दोनों देशों के बीच होने वाले व्यापार में सीधे भारतीय रुपये और जापानी येन के जरिए भुगतान की सुविधा मिल सकती है।

रुपये-येन में सीधे भुगतान की तैयारी

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत भारत और जापान के कारोबारी लेनदेन में डॉलर के माध्यम से मुद्रा बदलने की जरूरत कम हो सकती है। इसका उद्देश्य विदेशी मुद्रा बदलने की लागत को घटाना, भुगतान प्रक्रिया को आसान बनाना और व्यापार को अधिक सुविधाजनक बनाना है। माना जा रहा है कि इससे दोनों देशों के बैंक सीधे रुपये और येन में सीमा पार भुगतान का निपटान कर सकेंगे।

शिखर सम्मेलन में हो सकती है चर्चा

भारत और जापान के बीच होने वाले वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान इस मुद्दे पर चर्चा होने की संभावना है। इस बैठक में व्यापार, निवेश और रणनीतिक साझेदारी के साथ-साथ वित्तीय सहयोग को मजबूत करने पर भी जोर दिया जा सकता है। अगर मुद्रा सहयोग को संयुक्त बयान में शामिल किया जाता है, तो यह दोनों देशों के बीच आर्थिक रिश्तों में एक अहम कदम माना जाएगा।

कारोबारियों को मिल सकता है फायदा

लोकल करेंसी में व्यापार होने से कंपनियों को कई फायदे मिल सकते हैं। डॉलर में भुगतान करने पर मुद्रा विनिमय से जुड़ी लागत बढ़ जाती है, जिसे कम किया जा सकता है। इसके अलावा भुगतान प्रक्रिया तेज हो सकती है और तीसरे देश के बैंकिंग नेटवर्क पर निर्भरता भी घट सकती है।

भारत पहले से बढ़ा रहा है रुपये में व्यापार

भारत पिछले कुछ समय से अंतरराष्ट्रीय व्यापार में रुपये के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक ने रुपये में अंतरराष्ट्रीय लेनदेन को आसान बनाने के लिए विशेष व्यवस्था शुरू की थी, जिसके जरिए विदेशी व्यापार में रुपये के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य वैश्विक व्यापार में रुपये की भूमिका को मजबूत करना और विदेशी मुद्रा पर निर्भरता कम करना है।

जापान के साथ रिश्तों को मिलेगी नई मजबूती

भारत और जापान पहले से ही व्यापार और रणनीतिक साझेदारी में महत्वपूर्ण भागीदार हैं। दोनों देशों के बीच निवेश, तकनीक और उद्योग के क्षेत्र में सहयोग लगातार बढ़ रहा है। स्थानीय मुद्रा में लेनदेन की व्यवस्था आगे बढ़ती है तो यह दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को और मजबूत कर सकती है।

0 comments:

Post a Comment