नई व्यवस्था में मजदूरों को अब साल में 125 दिनों तक रोजगार की गारंटी मिलेगी। इसके साथ ही न्यूनतम मजदूरी 300 रुपये प्रतिदिन तय की गई है। सरकार का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को आर्थिक मजबूती देना और रोजगार के लिए पलायन को कम करना है।
अब 100 नहीं, मिलेंगे 125 दिन रोजगार
पहले ग्रामीण रोजगार योजना के तहत पात्र परिवारों को साल में 100 दिनों के रोजगार की गारंटी मिलती थी। नई योजना में इसमें 25 दिनों की बढ़ोतरी की गई है। योजना के तहत अगर किसी पात्र व्यक्ति को तय समय में काम नहीं मिलता है तो उसे बेरोजगारी भत्ता देने का प्रावधान किया गया है।
मजदूरी भुगतान में देरी पर मुआवजा
नई योजना में मजदूरों के भुगतान को लेकर भी नियम तय किए गए हैं। अगर मस्टर रोल बंद होने के 15 दिन बाद भी मजदूरी का भुगतान नहीं होता है तो श्रमिकों को प्रतिदिन 0.05 प्रतिशत की दर से क्षतिपूर्ति दी जाएगी। वहीं मजदूरी का भुगतान निर्धारित समय सीमा के अंदर करने का प्रावधान रखा गया है।
जारी होगा ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड
योजना के तहत पात्र परिवारों को ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड दिया जाएगा। आवेदन के 15 दिनों के भीतर कार्ड जारी करने की व्यवस्था होगी। इस कार्ड में परिवार के वयस्क सदस्यों की जानकारी, रोजगार की मांग, मिले काम के दिन, मजदूरी भुगतान, मुआवजा और किए गए कार्यों का पूरा रिकॉर्ड दर्ज रहेगा। कार्ड की वैधता तीन साल होगी, जिसके बाद इसे नवीनीकरण कराया जा सकेगा।
ग्राम पंचायतों की होगी अहम भूमिका
नई योजना के तहत कम से कम 50 प्रतिशत काम ग्राम पंचायतों के माध्यम से कराए जाएंगे। इससे गांव स्तर पर विकास कार्यों को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे। इस नई योजना से ग्रामीण मजदूरों को रोजगार सुरक्षा, समय पर भुगतान और बेहतर सुविधाएं मिलने की उम्मीद है।
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