यूपी में सभी 'ग्राम प्रधानों' के लिए नया अपडेट, पढ़ें पूरी डिटेल

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायतों और ग्राम प्रधानों को लेकर चल रहे विवाद पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है। पंचायत चुनावों को आगे बढ़ाने और मौजूदा ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए रखने के फैसले को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है।

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को इस मामले में चार सप्ताह के भीतर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई अब 3 अगस्त 2026 को होगी। यह आदेश न्यायमूर्ति अजित कुमार और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने दिया।

ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के फैसले पर उठे सवाल

दरअसल, उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से 26 मई 2026 को जारी शासनादेश के तहत निवर्तमान ग्राम प्रधानों को छह महीने तक ग्राम पंचायतों का प्रशासक नियुक्त करने की व्यवस्था की गई थी। इस फैसले को लेकर सवाल उठाए गए हैं कि क्या चुनाव प्रक्रिया को टालकर निर्वाचित प्रतिनिधियों की जगह प्रशासक नियुक्त करना संवैधानिक व्यवस्था के अनुरूप है।

इसी मामले को लेकर बीएएलएलबी तृतीय वर्ष के छात्र आयुष पाण्डेय और युधिष्ठिर वर्मा ने जनहित याचिका दाखिल की है। याचिका में सरकार के शासनादेश के साथ-साथ उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम, 1947 की धारा 12(3-ए) की वैधता को भी चुनौती दी गई है।

अब सिर्फ शासनादेश नहीं, कानून की भी होगी जांच

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यदि ग्राम पंचायत चुनाव टालने और प्रशासक नियुक्त करने की व्यवस्था इसी कानूनी प्रावधान के आधार पर की जा रही है, तो सिर्फ शासनादेश की समीक्षा पर्याप्त नहीं होगी। ऐसे में संबंधित कानून की संवैधानिकता की भी जांच जरूरी है। इससे पहले 22 जून 2026 को हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को याचिका में संशोधन करने की अनुमति दी थी। इसके बाद संशोधित याचिका दाखिल की गई, जिसमें कानूनी प्रावधान को भी चुनौती दी गई है।

संविधान के अनुच्छेद 243 ई का दिया गया हवाला

याचिका में कहा गया है कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 243 ई पंचायतों के निश्चित कार्यकाल और समय पर चुनाव कराने की व्यवस्था करता है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि पंचायतों का कार्यकाल पूरा होने के बाद लंबे समय तक प्रशासकों के माध्यम से व्यवस्था चलाना लोकतांत्रिक प्रक्रिया की भावना के खिलाफ हो सकता है।

ग्राम प्रधानों के लिए क्या है मामला?

फिलहाल हाईकोर्ट के आदेश के बाद ग्राम प्रधानों और पंचायत चुनावों से जुड़ा मामला फिर चर्चा में आ गया है। राज्य सरकार का जवाब आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि चुनाव प्रक्रिया और प्रशासक नियुक्ति को लेकर आगे क्या निर्णय होगा। फिलहाल निवर्तमान ग्राम प्रधानों की स्थिति और पंचायत चुनावों की तारीख को लेकर अंतिम फैसला हाईकोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई के बाद ही सामने आएगा।

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