बिजली कंपनियों की मांग पर नहीं लगी मुहर
बिजली वितरण कंपनियों ने इस वर्ष टैरिफ बढ़ाने के लिए कई प्रस्ताव नियामक आयोग के सामने रखे थे। कंपनियों ने वर्ष 2026-27 के लिए 1.18 लाख करोड़ रुपये से अधिक की वार्षिक राजस्व आवश्यकता (ARR) पेश की थी। समीक्षा के बाद आयोग ने इसे घटाकर करीब 1.13 लाख करोड़ रुपये स्वीकार किया और उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने वाले प्रस्तावों को मंजूरी नहीं दी।
स्मार्ट प्रीपेड मीटर का खर्च नहीं बढ़ाएगा बिल
बिजली कंपनियां स्मार्ट प्रीपेड मीटर योजना से जुड़े लगभग 3,838 करोड़ रुपये के खर्च को बिजली दरों में शामिल करना चाहती थीं। आयोग ने इस प्रस्ताव को यह कहते हुए स्वीकार नहीं किया कि कंपनियां यह साबित नहीं कर सकीं कि इस योजना से उन्हें कितना वास्तविक वित्तीय लाभ मिला है। ऐसे में इसका भार सीधे उपभोक्ताओं पर डालना उचित नहीं होगा।
सरकार ने बढ़ाई बिजली सब्सिडी
राज्य सरकार ने बिजली उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए सब्सिडी का दायरा भी बढ़ाया है। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार सब्सिडी बढ़ाकर 20,400 करोड़ रुपये कर दी गई है। इससे बिजली कंपनियों की वित्तीय जरूरतों और उपभोक्ताओं के हितों के बीच संतुलन बनाने में मदद मिलेगी।
इलेक्ट्रिक वाहनों को मिलेगा लाभ
स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोग ने इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशनों के लिए विशेष व्यवस्था लागू की है। दिन के समय सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक बैटरी चार्जिंग पर 20 प्रतिशत की रियायत दी जाएगी। माना जा रहा है कि इससे ई-वाहनों के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा।
क्या रहेगा नया बिजली टैरिफ?
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए आयोग ने बिजली की औसत आपूर्ति लागत ₹7.96 प्रति यूनिट तय की है, जबकि औसत बिलिंग दर ₹7.78 प्रति यूनिट निर्धारित की गई है। इसके बावजूद उपभोक्ताओं से मौजूदा टैरिफ के अनुसार ही शुल्क लिया जाएगा और किसी श्रेणी में नई दरें लागू नहीं होंगी।
करोड़ों उपभोक्ताओं को राहत
बिजली दरों को यथावत रखने के फैसले से प्रदेश के लगभग 3.80 करोड़ उपभोक्ताओं को सीधा लाभ मिलेगा। बढ़ती महंगाई के बीच बिजली बिल में बढ़ोतरी नहीं होने से घरेलू बजट पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ेगा। साथ ही छोटे उद्योग, व्यापारिक प्रतिष्ठान और कृषि क्षेत्र से जुड़े उपभोक्ताओं को भी इस फैसले से राहत मिलने की उम्मीद है।

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