आपको बता दें की यह अभियान 1 जुलाई से शुरू होकर 15 अगस्त तक पूरे प्रदेश में चलाया जाएगा। इसके तहत सभी तहसीलों में लंबे समय से लंबित भूमि सीमांकन और पैमाइश से जुड़े मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने का लक्ष्य रखा गया है।
जीएनएसएस तकनीक से जमीन की माप
अब तक जमीन की पैमाइश पारंपरिक तरीकों से होती रही है, जिसमें कई बार विवाद की स्थिति बन जाती थी। नई व्यवस्था में डिजी रोवर यानी जीएनएसएस तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे जमीन की माप अधिक सटीक और पारदर्शी तरीके से हो सकेगी। सरकार का मानना है कि आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से सीमांकन में होने वाली गलतियों को कम किया जा सकेगा और विवादों पर भी नियंत्रण लगेगा।
79 हजार से ज्यादा मामले हैं लंबित
प्रदेश में वर्तमान समय में भूमि पैमाइश और सीमांकन से जुड़े करीब 79,157 मामले लंबित हैं। सरकार ने इन मामलों को अभियान के तहत तेजी से निस्तारित करने का लक्ष्य रखा है। इससे किसानों और आम नागरिकों को वर्षों से चल रहे जमीन संबंधी विवादों से राहत मिलने की उम्मीद है।
अधिकारियों को दिए गए निर्देश
मुख्यमंत्री ने सभी मंडलायुक्तों, जिलाधिकारियों और राजस्व अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि अभियान को मिशन मोड में चलाया जाए। अधिकारियों को कहा गया है कि पैमाइश की पूरी प्रक्रिया तकनीकी मानकों के अनुसार हो और लोगों को समय पर न्याय मिले। साथ ही यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि किसी भी पात्र व्यक्ति को अनावश्यक परेशानी न हो।
तहसील स्तर पर होगी निगरानी
अभियान को सफल बनाने के लिए मंडलायुक्त, जिलाधिकारी, एसडीएम, तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक और लेखपाल मिलकर काम करेंगे। अधिकारियों को तय समय सीमा के अंदर ज्यादा से ज्यादा लंबित मामलों के निस्तारण का लक्ष्य दिया गया है।
किसानों और आम लोगों को राहत
जमीन विवाद ग्रामीण क्षेत्रों की बड़ी समस्याओं में शामिल रहे हैं। कई बार सीमांकन को लेकर विवाद वर्षों तक चलते रहते हैं। डिजी रोवर अभियान से ऐसे मामलों के समाधान में तेजी आने की उम्मीद है। सरकार का उद्देश्य केवल पुराने मामलों को खत्म करना ही नहीं, बल्कि भविष्य में भी भूमि संबंधी विवादों को कम करने के लिए तकनीक आधारित व्यवस्था को मजबूत करना है।

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