गेहूं, चना से लेकर सब्जियों की खेती को बढ़ावा
योजना के तहत रबी मौसम में 18,000 एकड़ में जीरो टिलेज तकनीक से गेहूं, चना और मसूर की खेती कराई जाएगी। वहीं, रेज्ड बेड तकनीक के जरिए मक्का, सरसों, अलसी, मसालों और सब्जियों की खेती को प्रोत्साहित किया जाएगा। गरमा मौसम में 9,600 एकड़ भूमि पर मक्का, मूंग, उड़द, मोटे अनाज, सूरजमुखी, तिल, हरी खाद के लिए ढैंचा और सब्जियों की खेती को बढ़ावा देने की योजना है।
18 हजार किसानों को मिलेगा प्रशिक्षण
इस कार्यक्रम के तहत 18,000 किसानों को खेतों में व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके अलावा, 3,600 किसानों को एक्सपोजर विजिट के जरिए उन्नत कृषि तकनीकों की जानकारी दी जाएगी। चयनित गांवों में कस्टम हायरिंग सेंटर भी स्थापित किए जाएंगे, जहां किसानों को कृषि कार्यों के लिए मशीनें उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
किसानों को क्या होगा फायदा?
जलवायु अनुकूल खेती से किसानों को बदलते मौसम के अनुसार फसल उत्पादन की तकनीक अपनाने में मदद मिलेगी। जीरो टिलेज और रेज्ड बेड जैसी पद्धतियों का उद्देश्य खेती को अधिक प्रभावी बनाना और संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करना है।
सरकार की इस पहल से चयनित गांवों के किसानों को आधुनिक तकनीक सीखने और खेती के नए तरीके अपनाने का अवसर मिलेगा। हालांकि, उत्पादन और आमदनी में वास्तविक बढ़ोतरी खेती की परिस्थितियों, मौसम और तकनीकों के सही इस्तेमाल पर निर्भर करेगी।

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