संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास सम्मेलन (UNCTAD) की व्यापार और विकास रिपोर्ट 2026: विकास का भू-अर्थशास्त्र के मुताबिक, वैश्विक आर्थिक सुस्ती के बावजूद भारत प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में तेज विकास करने वाले देशों में शामिल रह सकता है। हालांकि, ये आंकड़े अनुमान हैं और वास्तविक विकास दर आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार बदल सकती है।
भारत, चीन की विकास दर में कितना अंतर?
रिपोर्ट में दिए गए अनुमानों के अनुसार, 2026 में भारत की विकास दर 7.3 फीसदी रहने की संभावना है। वहीं चीन के लिए 4.5 फीसदी रहने का अनुमान जताया गया है। इन आंकड़ों के आधार पर भारत की अर्थव्यवस्था की रफ्तार चीन से अधिक रहने की संभावना है।
रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक आर्थिक वृद्धि में एशिया की भूमिका भी महत्वपूर्ण बनी रहेगी। वर्ष 2026 में दुनिया की आर्थिक वृद्धि में क्षेत्र का योगदान करीब 59 फीसदी रहने का अनुमान है।
घरेलू मांग से मिल रहा है सहारा
भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने वाले प्रमुख कारणों में घरेलू बाजार की मांग शामिल है। देश में उपभोग, सेवाओं की गतिविधियां और उत्पादन से जुड़ी जरूरतें आर्थिक गतिविधियों को गति दे सकती हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में घरेलू खपत की वृद्धि दर 2026 में 6.9 फीसदी और 2027 में 5.6 फीसदी रहने का अनुमान है।
इसके साथ ही मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र का विस्तार और सड़क, परिवहन सहित बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर निवेश भी विकास को सहारा दे सकता है। हालांकि, महंगाई, उत्पादन लागत और वैश्विक बाजार में होने वाले बदलाव अर्थव्यवस्था के सामने चुनौतियां बने रह सकते हैं।
दुनिया की अर्थव्यवस्था पर बढ़ता दबाव
जहां भारत के लिए अपेक्षाकृत तेज वृद्धि का अनुमान है, वहीं वैश्विक अर्थव्यवस्था की तस्वीर कुछ अलग है। UNCTAD के अनुमानों के अनुसार, विश्व की आर्थिक विकास दर 2026 में घटकर 2.6 फीसदी रह सकती है, जबकि पिछले वर्ष यह 2.9 फीसदी थी। विकासशील देशों की औसत वृद्धि दर भी 4.7 फीसदी से घटकर 4 फीसदी रहने का अनुमान है।
ऐसे माहौल में भारत की संभावित विकास दर देश के आर्थिक प्रदर्शन के लिहाज से अहम है। फिर भी, कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता, वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता और महंगाई जैसे कारक आगे की आर्थिक स्थिति को प्रभावित कर सकते हैं।

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