केंद्र सरकार ला रही सख्त नियम, इन लोगों पर भी होगा लागू

नई दिल्ली। डॉक्टर की पर्ची पर मिलने वाली दवाओं के विज्ञापन को लेकर केंद्र सरकार नियम सख्त करने की तैयारी में है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने ड्रग्स रूल्स, 1945 में संशोधन का मसौदा जारी किया है। इसके लागू होने पर दवा कंपनियों के साथ खुदरा विक्रेताओं, थोक कारोबारियों और वितरकों को भी विज्ञापन संबंधी पाबंदियों के दायरे में लाने का प्रस्ताव है।

बिना अनुमति नहीं कर सकेंगे दवाओं का विज्ञापन

प्रस्ताव के अनुसार, शेड्यूल H, H1 और X में शामिल दवाओं का विज्ञापन करने के लिए केंद्र सरकार की पूर्व अनुमति जरूरी होगी। इन श्रेणियों में ऐसी दवाएं आती हैं, जिनकी बिक्री निर्धारित नियमों के तहत डॉक्टर की पर्ची पर की जाती है। इनमें कुछ एंटीबायोटिक्स और अन्य प्रिस्क्रिप्शन दवाएं शामिल हैं।

दवा दुकानदारों पर भी लागू होंगे नियम

अब तक विज्ञापन संबंधी यह प्रतिबंध मुख्य रूप से दवा बनाने वाली कंपनियों पर लागू था। नए मसौदे में दवाओं का स्टॉक रखने, बेचने, बिक्री के लिए प्रदर्शित करने या वितरण करने का लाइसेंस रखने वालों को भी शामिल करने का प्रस्ताव है। इससे दवाओं के प्रचार और बिक्री से जुड़े नियमों की निगरानी मजबूत करने में मदद मिल सकती है।

फिलहाल प्रस्ताव, सुझावों के बाद होगा फैसला

स्वास्थ्य मंत्रालय ने 28 सितंबर 2026 को जारी गजट अधिसूचना के जरिए संशोधन का मसौदा सामने रखा है। इस पर संबंधित पक्षों और आम लोगों से सुझाव व आपत्तियां मांगी गई हैं। निर्धारित अवधि में प्राप्त प्रतिक्रियाओं पर विचार करने के बाद सरकार आगे का फैसला करेगी।

ध्यान दें: अभी यह प्रस्तावित बदलाव है, अंतिम नियम नहीं। इसलिए इसे लागू होने से पहले ही प्रभावी कानून मानना सही नहीं होगा।

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