अब खतौनी पर मिलेगा QR कोड
नई व्यवस्था के तहत खतौनी में क्यूआर कोड और डिजिटल हस्ताक्षर की सुविधा दी जा रही है। इससे जमीन के दस्तावेजों की प्रामाणिकता जांचना आसान होगा। पहले कई प्रक्रियाओं के लिए लोगों को ऑफलाइन व्यवस्था पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन अब डिजिटल माध्यम से काम को अधिक सुविधाजनक बनाने की कोशिश की गई है।
ऑनलाइन वरासत से लाखों लोगों को राहत
जमीन मालिक की मृत्यु के बाद वारिस का नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज कराने की प्रक्रिया को वरासत कहा जाता है। अब यह सुविधा ऑनलाइन उपलब्ध है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में अब तक 65 लाख से ज्यादा वरासत दर्ज की जा चुकी हैं। इससे लोगों को सरकारी रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराने के लिए बार-बार कार्यालय जाने की परेशानी कम हो सकती है।
भू-नक्शे और खसरे भी हुए डिजिटल
सरकार ने जमीन के नक्शों को भी डिजिटल रूप दिया है। उपलब्ध भू-नक्शों और शजरों का डिजिटलीकरण पूरा हो चुका है, जबकि 98 प्रतिशत नक्शों को खतौनी से जोड़ा गया है। इसके अलावा, खेतों का हिस्सा तय करने यानी अंश निर्धारण का काम भी तेजी से आगे बढ़ा है।
जमीन के रिकॉर्ड में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद
रियल टाइम खतौनी, ऑनलाइन वरासत और डिजिटल नक्शों जैसी सुविधाओं से जमीन के रिकॉर्ड को अपडेट रखना और उनका सत्यापन करना आसान हो सकता है। इन बदलावों से भूमि संबंधी विवादों को कम करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि, किसी जमीन की खरीद-बिक्री या विवाद से जुड़े मामले में दस्तावेजों की आधिकारिक जांच कराना जरूरी है।

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