चीन के दबदबे को भारत की चुनौती! दुनिया में बढ़ रहा भारतीय ताकत

नई दिल्ली। भारत अब अपने निर्यात के लिए अमेरिका और यूरोप के अलावे नए अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तेजी से पैर पसार रहा है। अफ्रीका और आसियान देशों में भारतीय उत्पादों की बढ़ती मांग इस बदलाव का संकेत है। खास बात यह है कि इन बाजारों में चीन की मजबूत मौजूदगी के बावजूद भारतीय कंपनियां अपनी जगह बनाने में सफल हो रही हैं।

अफ्रीका में भारतीय उत्पाद

अफ्रीका में चीन लंबे समय से बड़ा व्यापारिक साझेदार रहा है। लेकिन अब भारतीय उत्पाद भी वहां के उपभोक्ताओं तक तेजी से पहुंच रहे हैं। दक्षिण अफ्रीका, नाइजीरिया और मिस्र जैसे प्रमुख बाजारों में भारत के निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में दक्षिण अफ्रीका को निर्यात 51 प्रतिशत, नाइजीरिया को 19.6 प्रतिशत और मिस्र को 72 प्रतिशत बढ़ने की जानकारी दी गई है।

वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल से अगस्त 2026 के दौरान अफ्रीका को भारत का निर्यात 47 प्रतिशत बढ़कर 26.19 अरब डॉलर पहुंच गया, जबकि आसियान देशों में निर्यात 56 प्रतिशत बढ़कर 23.08 अरब डॉलर रहा। अफ्रीका की भारत के कुल निर्यात में हिस्सेदारी भी 9.7 प्रतिशत से बढ़कर 12.2 प्रतिशत हो गई। 

इन क्षेत्रों की भूमिका अहम

इस बढ़त में इलेक्ट्रॉनिक्स, पेट्रोलियम उत्पाद, इंजीनियरिंग सामान और वाहन जैसे क्षेत्रों की भूमिका अहम है। हालांकि, निर्यात में तेजी को केवल चीन के खिलाफ मुकाबले के रूप में देखना सही नहीं होगा; यह भारत की नए बाजार तलाशने की रणनीति का भी नतीजा है। 

आने वाले समय में अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया के बाजार भारत के लिए निर्यात विस्तार के बड़े अवसर बन सकते हैं। नए व्यापारिक साझेदारों तक पहुंच बढ़ने से भारतीय कंपनियों को कारोबार फैलाने और वैश्विक व्यापार में अपनी स्थिति मजबूत करने का मौका मिलेगा।

0 comments:

Post a Comment