जामनगर रिफाइनरी रही सबसे आगे
इस कारोबार में गुजरात स्थित रिलायंस इंडस्ट्रीज की जामनगर रिफाइनरी की अहम भूमिका रही। रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर में यूरोपीय संघ के बंदरगाहों पर पहुंचे सात कार्गो में से छह की आपूर्ति इसी रिफाइनरी से हुई। अमेरिका को भी जामनगर से बड़ी मात्रा में पेट्रोलियम उत्पाद भेजे गए। हालांकि, यूरोपीय संघ ने जनवरी 2026 से रूस के कच्चे तेल से तैयार पेट्रोलियम उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध लगा रखा है, जिसके चलते इस व्यापार पर निगरानी बढ़ गई है।
रूस से कच्चे तेल की खरीद में आई गिरावट
दिलचस्प बात यह है कि सितंबर में भारत ने रूस से कच्चे तेल का आयात पिछले महीने के मुकाबले 13 फीसदी घटाया। इसके बावजूद भारत रूसी जीवाश्म ईंधन का बड़ा खरीदार बना रहा। रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान भारत ने रूस से लगभग 4.1 अरब यूरो के जीवाश्म ईंधन खरीदे, जिनमें सबसे बड़ा हिस्सा कच्चे तेल का था।
आगे क्या होगा?
रूसी यूराल्स कच्चा तेल सितंबर में ब्रेंट के मुकाबले करीब 23 डॉलर प्रति बैरल सस्ता रहा। इससे भारतीय रिफाइनरियों को लागत के लिहाज से फायदा मिलने की संभावना बनी हुई है। हालांकि, रूस से तेल की उपलब्धता, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और दूसरे देशों से मिल रही प्रतिस्पर्धा का असर आगे के कारोबार पर पड़ सकता है। ऐसे में भारतीय रिफाइनरियों के लिए रूसी तेल एक अवसर भी है और बदलते वैश्विक नियमों के बीच चुनौती भी।

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