इस डिजिटल व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा उन परिवारों को मिल रहा है, जिन्हें जमीन के मालिक की मृत्यु के बाद उत्तराधिकारियों का नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज कराना होता है। अब इस प्रक्रिया के लिए ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है, जिससे तहसील के बार-बार चक्कर लगाने की परेशानी कम हो सकती है।
जमीन के रिकॉर्ड में हुए ये बड़े बदलाव
प्रदेश में खतौनी और भू नक्शों को डिजिटल बनाने के साथ कई महत्वपूर्ण काम किए गए हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, भू नक्शों और शजरों का डिजिटलीकरण पूरा हो चुका है, जबकि लगभग 98 प्रतिशत डिजिटल भू नक्शों को खतौनी से जोड़ा गया है। इसके अलावा, 85 प्रतिशत से अधिक गाटों में खातेदारों के हिस्से का निर्धारण किया जा चुका है। डिजिटल खतौनी में क्यूआर कोड और डिजिटल हस्ताक्षर जैसी सुविधाओं से रिकॉर्ड की जांच करना भी आसान हुआ है।
ऑनलाइन विरासत के लिए दस्तावेज
अगर किसी जमीन मालिक की मृत्यु हो गई है और उसके वारिस अपना नाम खतौनी में दर्ज कराना चाहते हैं, तो आवेदन के लिए आमतौर पर ये दस्तावेज जरूरी हो सकते हैं: मृतक का मृत्यु प्रमाण पत्र, सभी वारिसों के पहचान पत्र, आवश्यक शपथ पत्र, पुरानी खतौनी या भूमि रिकॉर्ड की प्रति, निवास प्रमाण पत्र या राशन कार्ड, जहां आवश्यक हो।
घर बैठे कैसे कराएं जमीन अपने नाम?
ऑनलाइन विरासत दर्ज कराने के लिए उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद के आधिकारिक पोर्टल https://vaad.up.nic.in/ पर जाएं। वहां उपलब्ध संबंधित ऑनलाइन आवेदन सुविधा के निर्देशों का पालन करें। आवेदन में मृतक भूस्वामी, जमीन और सभी कानूनी वारिसों का सही विवरण भरें। जरूरी दस्तावेज जमा करने के बाद आवेदन संख्या सुरक्षित रख लें। इसके बाद संबंधित राजस्व अधिकारी आवेदन और दस्तावेजों का सत्यापन करेंगे। नाम दर्ज होने की समय-सीमा मामले और सत्यापन प्रक्रिया के अनुसार अलग हो सकती है।
जमीन मालिकों को क्या होगा फायदा?
डिजिटल भू अभिलेख व्यवस्था से जमीन की जानकारी प्राप्त करना आसान हो सकता है। साथ ही, उत्तराधिकार दर्ज कराने की प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ने और अनावश्यक कार्यालयी चक्कर कम होने की उम्मीद है। जिन परिवारों को विरासत के आधार पर खतौनी में नाम दर्ज कराना है, वे आधिकारिक पोर्टल पर उपलब्ध सुविधा का लाभ उठा सकते हैं।

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