सिर्फ 15% प्रीमियम देना होगा
योजना की खास बात यह है कि पात्र लाभार्थियों को बीमा प्रीमियम का केवल 15 प्रतिशत हिस्सा देना पड़ सकता है, जबकि बाकी राशि सरकार की ओर से सब्सिडी के रूप में दी जाती है। बीमित पशु की मृत्यु होने पर नियमानुसार दावा मिलने से पशुपालकों को आर्थिक नुकसान से राहत मिल सकती है।
किन पशुओं का करा सकते हैं बीमा?
योजना के तहत स्वदेशी और संकर दुधारू पशुओं के अलावा घोड़ा, गधा, खच्चर, ऊंट, टट्टू, भैंसा और सांड जैसे बड़े पशुओं को शामिल किया गया है। छोटे पशुओं में बकरी, भेड़ और सूकर का भी बीमा कराया जा सकता है। प्रति परिवार पशुओं की संख्या निर्धारित सीमा के अनुसार होगी।
बीमा योजना के प्रमुख फायदे
पशु की मृत्यु होने पर नियमानुसार बीमा राशि का दावा किया जा सकता है।
पूर्ण स्थायी दिव्यांगता के कुछ मामलों में बीमित राशि के 75 प्रतिशत तक भुगतान का प्रावधान है।
पशु बेचने पर निर्धारित प्रक्रिया और शुल्क के जरिए बीमा नए मालिक के नाम हस्तांतरित किया जा सकता है।
बीमित पशु की पहचान के लिए यूनिक टैग लगाया जाता है और पॉलिसी मोबाइल लिंक के माध्यम से मिल सकती है।
आवेदन कहां करें?
योजना का लाभ लेने के इच्छुक पशुपालक अपने नजदीकी सरकारी पशु चिकित्सालय या पशुपालन विभाग के कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं। वहां पशु की पात्रता, मूल्यांकन, टैगिंग और आवेदन प्रक्रिया की जानकारी मिल सकती है। आवेदन करने से पहले सब्सिडी, बीमा की शर्तों और जरूरी दस्तावेजों की पुष्टि जरूर कर लें।

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