क्या है घरौनी कानून?
घरौनी कानून का उद्देश्य उन ग्रामीण क्षेत्रों में मालिकाना हक को स्पष्ट करना है, जहां पहले राजस्व रिकॉर्ड में आबादी वाले हिस्सों का सही तरीके से विवरण नहीं था। इससे न केवल भूमि विवादों का सामना करना पड़ता था, बल्कि बैंकों से लोन लेने में भी दिक्कतें आती थीं। यही नहीं, कई बार ऐसे मामलों को अदालतों में खींचा जाता था, जिससे समस्याएं और बढ़ जाती थीं। 2020 में यूपी सरकार ने एक अधिसूचना जारी की थी, जिसमें ग्रामीण आबादी का सर्वे और घरौनी प्रबंधन नियमावली को लागू करने की कोशिश की गई थी। हालांकि, यह नियमावली किसी विधायिका के तहत नहीं थी, इस कारण कई मामलों में अदालतों में विवाद उठ खड़े हुए थे।
क्या बदलाव आएंगे?
अब यूपी सरकार ने ग्रामीण आबादी अभिलेख विधेयक-2025 का प्रारूप तैयार कर लिया है, जिसमें 2020 की अधिसूचना के सभी प्रावधानों को शामिल किया गया है। साथ ही इस विधेयक में यह भी प्रावधान होगा कि अगर किसी को घरौनी दस्तावेज पर आपत्ति हो, तो वह उसे चुनौती दे सकता है और संशोधन का अधिकार भी मिलेगा। यह कदम सरकारी कामकाजी प्रक्रिया को सरल बनाने और कानूनी अड़चनों को दूर करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
अधिनियम के तहत होगा घरौनी कानून
राजस्व विभाग ने इस संबंध में शासन को प्रस्ताव भेज दिया है और अब इस पर जल्द ही निर्णय लिया जा सकता है। सूत्रों के मुताबिक, चूंकि विधेयक को विधानमंडल के माध्यम से पास करवाने में समय लगेगा, इसलिए सरकार इसे अध्यादेश के रूप में लागू करने का विचार कर रही है। गौरतलब है कि अध्यादेश को छह महीने के भीतर विधानमंडल में पेश किया जाना आवश्यक होता है।
इस कानून से ग्रामीणों को होगा बड़ा लाभ
इस नए घरौनी कानून से सबसे ज्यादा फायदा उन ग्रामीणों को होगा, जिनके पास कानूनी दस्तावेजों की कमी थी और जो अपने मकान या जमीन पर मालिकाना हक साबित नहीं कर पा रहे थे। अब उन्हें अपने संपत्ति संबंधी मामलों में किसी भी प्रकार की कानूनी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा और बैंकों से लोन मिलने में भी आसानी होगी।
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