क्या है नया बदलाव
पहले इस योजना के तहत एक महिला को केवल एक केज (मछली पालन के लिए पिंजरा) पर ही अनुदान मिलता था। लेकिन अब नियमों में बदलाव करते हुए सरकार ने इसे बढ़ाकर न्यूनतम 4 और अधिकतम 8 केज तक कर दिया है। यानी अब महिलाएं बड़े स्तर पर मत्स्य पालन कर सकेंगी और अपनी कमाई को कई गुना तक बढ़ा सकेंगी।
कितना मिलेगा अनुदान
इस योजना के तहत सरकार इकाई लागत का 60 प्रतिशत अनुदान देती है। एक केज की लागत लगभग 3 लाख रुपये तय की गई है, जिसमें महिला लाभार्थी को करीब 1.80 लाख रुपये की सहायता मिलेगी। अगर कोई महिला 4 से 8 केज लगाती है, तो उसे उसी अनुपात में अधिक आर्थिक सहायता प्राप्त होगी, जिससे बड़े पैमाने पर व्यवसाय शुरू करना आसान हो जाएगा।
किन महिलाओं को मिलेगा लाभ
इस योजना का लाभ खास तौर पर उन महिलाओं को दिया जाएगा, जो मत्स्य पालन या उससे जुड़े कार्यों से संबंध रखती हैं। इसमें मछुआरा समुदाय और पारंपरिक मत्स्य व्यवसाय से जुड़े वर्ग शामिल हैं, जैसे केवट, मल्लाह, निषाद, बिंद, धीमर, कश्यप आदि। इसके अलावा, ऐसी महिलाएं भी आवेदन कर सकती हैं जो कम से कम एक साल से मत्स्य पालन या संबंधित गतिविधियों से जुड़ी हुई हैं।
इस योजना के लिए पात्रता की शर्तें क्या हैं ?
महिला आवेदक को उस जलाशय के 10 किलोमीटर के दायरे में रहना जरूरी है, जहां केज लगाए जाएंगे।
यदि उस क्षेत्र में कोई पात्र महिला उपलब्ध नहीं है, तो यह सीमा बढ़ाकर 20 किलोमीटर तक की जा सकती है।
आवेदन केज की संख्या सम में ही करना होगा, यानी 4, 6 या 8 केज के लिए ही आवेदन किया जा सकता है।

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