बिहार में जमीन सर्वे पर सख्ती: रैयतों के लिए अहम अपडेट!

पटना। बिहार में जमीन सर्वेक्षण को लेकर सरकार अब पूरी तरह एक्शन मोड में आ गई है। लंबे समय से चल रहे इस महत्वपूर्ण अभियान को समय पर पूरा करने के लिए सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। सरकार का साफ कहना है कि अब काम में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

हर 15 दिन में होगी समीक्षा

उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि जमीन सर्वे का काम तय समयसीमा में पूरा किया जाए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अब हर 15 दिन में खुद इस काम की समीक्षा करेंगे। इससे साफ है कि सरकार इस परियोजना को लेकर बेहद गंभीर है।

अधिकारियों के लिए सख्त गाइडलाइन

सर्वे कार्य में तेजी लाने के लिए अधिकारियों को रोजाना लक्ष्य तय करने को कहा गया है। दिनभर के काम की समीक्षा शाम को करना और उसकी रिपोर्ट मुख्यालय को भेजना अनिवार्य कर दिया गया है। इससे काम की लगातार मॉनिटरिंग हो सकेगी और किसी भी तरह की देरी पर तुरंत कार्रवाई की जा सकेगी।

क्या है सरकार का लक्ष्य

सरकार ने पहले चरण में 20 जिलों के 89 अंचलों में चल रहे सर्वे को इस साल के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। अभी तक करीब 67% क्षेत्रों में ड्राफ्ट पब्लिकेशन हो चुका है, जबकि 33% से अधिक जगहों पर अंतिम प्रकाशन भी पूरा कर लिया गया है। दूसरे चरण में 36 जिलों के 445 अंचलों में सर्वे का काम तेजी से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें सीमांकन, सत्यापन और अन्य जरूरी प्रक्रियाएं शामिल हैं।

निगरानी के लिए विशेष टीम

सर्वे कार्य की बेहतर निगरानी के लिए विभाग में एक विशेष टीम का गठन किया गया है। यह टीम हर स्तर पर प्रगति पर नजर रख रही है और समय-समय पर रिपोर्ट तैयार कर रही है।

शेखपुरा बना उदाहरण

शेखपुरा जिला इस अभियान में सबसे आगे बताया जा रहा है। यहां सर्वे का काम अंतिम चरण में पहुंच चुका है। सरकार इसे अन्य जिलों के लिए मॉडल के रूप में पेश कर रही है, ताकि बाकी जिलों में भी इसी तरह तेजी लाई जा सके।

क्यों जरूरी है यह सर्वे

जमीन सर्वे का मुख्य उद्देश्य भूमि से जुड़े विवादों को कम करना और लोगों को स्पष्ट स्वामित्व का अधिकार देना है। जानकारों का मानना है कि अगर यह अभियान निष्पक्ष और सही तरीके से पूरा होता है, तो भविष्य में जमीन विवादों में काफी कमी आएगी।

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