क्या है सरकार का नया आदेश
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 18 मार्च 2026 को एक नोटिफिकेशन जारी करते हुए सभी तेल और गैस कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे अपने स्टॉक और संचालन से जुड़ा पूरा डेटा साझा करें। यह आदेश आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 3 के तहत लागू किया गया है, जिससे सरकार को जरूरी जानकारी समय पर मिल सके।
PPAC को बनाया गया नोडल एजेंसी
सरकार ने पेट्रोलियम योजना और विश्लेषण प्रकोष्ठ को इस पूरी प्रक्रिया का नोडल एजेंसी नियुक्त किया है। यह संस्था सभी कंपनियों से डेटा एकत्र करेगी, उसका विश्लेषण करेगी और जरूरत पड़ने पर सरकार को रिपोर्ट देगी।
कंपनियों को कौन-कौन सी जानकारी देनी होगी
नए निर्देशों के तहत कंपनियों को कई अहम जानकारियां साझा करनी होंगी, जैसे:
उत्पादन (Production) का सटीक आंकड़ा
आयात और निर्यात से जुड़ी जानकारी
मौजूदा स्टॉक और भंडारण की स्थिति
गैस और तेल का आवंटन
ट्रांसपोर्टेशन और सप्लाई चेन की डिटेल
बाजार में खपत और उपयोग का डेटा
यह जानकारी रोजाना, साप्ताहिक या मासिक आधार पर तय समयसीमा में देनी होगी।
किन कंपनियों पर लागू होगा आदेश
यह नियम सार्वजनिक और निजी दोनों सेक्टर की सभी कंपनियों पर लागू होगा। इसमें कच्चे तेल के उत्पादक, रिफाइनरी, ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs), गैस पाइपलाइन ऑपरेटर, LNG टर्मिनल ऑपरेटर, सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियां और पेट्रोकेमिकल यूनिट्स शामिल हैं।
डेटा छिपाने पर सख्ती
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि कोई भी कंपनी यह कहकर जानकारी देने से मना नहीं कर सकती कि डेटा गोपनीय या व्यावसायिक रूप से संवेदनशील है। यह आदेश सभी मौजूदा अनुबंधों और व्यावसायिक समझौतों से ऊपर लागू होगा।
क्यों लिया गया यह फैसला
वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति में अस्थिरता को देखते हुए सरकार एक मजबूत और केंद्रीकृत निगरानी तंत्र बनाना चाहती है। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि देश में गैस और पेट्रोलियम उत्पादों की कमी न हो और जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।
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