पूर्वी और पश्चिमी यूपी के बीच बेहतर कनेक्शन
इस प्रस्तावित एक्सप्रेसवे का उद्देश्य पूर्वांचल और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बीच यात्रा को आसान बनाना है। वर्तमान में इन दोनों क्षेत्रों के बीच लंबी दूरी और समय लगता है, लेकिन इस नई सड़क के बनने से सफर काफी तेज और सुविधाजनक हो जाएगा। इससे व्यापार, उद्योग और पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
लगभग 35 हजार करोड़ रुपये की परियोजना
इस महत्वाकांक्षी परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 35,000 करोड़ रुपये बताई जा रही है। परियोजना के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की जा चुकी है और जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है। अगर सब कुछ तय योजना के अनुसार रहा तो निर्माण कार्य 2026–27 के आसपास शुरू हो सकता है।
कई जिलों को मिलेगा सीधा लाभ
गोरखपुर से शुरू होकर शामली तक जाने वाला यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के करीब 22 जिलों से होकर गुजरेगा। इनमें सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, बरेली, सीतापुर, लखनऊ, बहराइच, बलरामपुर और सिद्धार्थनगर जैसे जिले शामिल बताए जा रहे हैं। इन जिलों के लोगों को बेहतर सड़क सुविधा मिलने के साथ-साथ आर्थिक गतिविधियों में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
दूसरे एक्सप्रेसवे से भी कनेक्शन
यह नया एक्सप्रेसवे राज्य के कई बड़े एक्सप्रेसवे और हाईवे से भी जुड़ने की योजना में है। इससे गंगा एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, लखनऊ–गोरखपुर मार्ग और दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे जैसे महत्वपूर्ण रास्तों तक सीधी पहुंच मिल सकेगी। इस तरह यह परियोजना पूरे प्रदेश के सड़क नेटवर्क को और मजबूत बनाने में मदद करेगी।
विकास को मिलेगी नई रफ्तार
जानकारों का मानना है कि इस एक्सप्रेसवे के बनने से न केवल यात्रा का समय कम होगा बल्कि उद्योग, लॉजिस्टिक्स और व्यापार को भी बड़ा लाभ मिलेगा। बेहतर कनेक्टिविटी से नए निवेश के अवसर बढ़ सकते हैं और कई जिलों में रोजगार के नए रास्ते खुल सकते हैं।

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