किसानों के लिए 4 बड़ी खुशखबरी! सरकार ने किए अहम ऐलान

भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने किसानों के हित में बड़ा फैसला लिया है। राज्य के किसानों को उनकी फसलों का बेहतर दाम दिलाने के लिए सरकार ने गेहूं और उड़द की खरीद पर बोनस देने की घोषणा की है। इसके साथ ही गेहूं खरीदी के लिए पंजीकरण की अंतिम तारीख भी बढ़ा दी गई है, जिससे ज्यादा से ज्यादा किसान इस योजना का लाभ उठा सकें।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने निवास समत्व भवन में किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर किसानों से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा की। इस बैठक में कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना और विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। बैठक के दौरान किसानों की आय बढ़ाने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

उड़द की खरीदी पर मिलेगा 600 रुपये प्रति क्विंटल बोनस

राज्य सरकार ने किसानों को दलहन की खेती के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से उड़द की खरीदी पर 600 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार चाहती है कि किसान अधिक से अधिक उड़द की खेती करें, ताकि उन्हें अतिरिक्त आय प्राप्त हो सके। इससे किसानों को आर्थिक मजबूती मिलेगी और अगली फसल की तैयारी भी आसानी से हो सकेगी।

गेहूं पर मिलेगा बोनस, बढ़ेगा किसानों का मुनाफा

मध्य प्रदेश सरकार ने गेहूं उत्पादक किसानों को भी राहत दी है। वर्ष 2026-27 के लिए गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के साथ 40 रुपये प्रति क्विंटल का अतिरिक्त बोनस दिया जाएगा। इस तरह किसानों को गेहूं के लिए कुल 2625 रुपये प्रति क्विंटल का भुगतान मिलेगा। सरकार ने यह भी संकल्प लिया है कि वर्ष 2028 तक गेहूं की खरीद 2700 रुपये प्रति क्विंटल के लक्ष्य तक पहुंचाई जाएगी।

गेहूं खरीद के लिए रजिस्ट्रेशन की तारीख बढ़ाई

कई किसानों को पंजीकरण में हो रही परेशानियों को देखते हुए सरकार ने गेहूं खरीद के लिए रजिस्ट्रेशन की अंतिम तारीख बढ़ा दी है। पहले यह तारीख 7 मार्च तय की गई थी, जिसे अब बढ़ाकर 10 मार्च कर दिया गया है। इससे वे किसान भी अपना पंजीकरण करा सकेंगे जो अब तक किसी कारण से आवेदन नहीं कर पाए थे।

किसानों के लिए बिजली व्यवस्था पर भी जोर

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसानों को सिंचाई के लिए दिन में ही बिजली उपलब्ध कराई जाए। इससे किसानों को रात में सिंचाई करने की परेशानी से राहत मिलेगी और दुर्घटनाओं का खतरा भी कम होगा। साथ ही बिजली से जुड़ी शिकायतों का समाधान स्थानीय स्तर पर ही करने की व्यवस्था बनाने पर भी जोर दिया गया है।

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