राज्य के लगभग 71,297 प्रारंभिक विद्यालयों में पढ़ने वाले करीब 1 करोड़ 33 लाख से अधिक छात्रों का मूल्यांकन अब ग्रेडिंग प्रणाली के आधार पर किया जाएगा। यह ग्रेडिंग छात्रों को उनकी वार्षिक परीक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर दी जाएगी। इस प्रक्रिया के माध्यम से बच्चों को पाँच श्रेणियों A, B, C, D और E ग्रेड में विभाजित किया जाएगा।
कमजोर छात्रों पर विशेष ध्यान
नई व्यवस्था के अनुसार जिन छात्रों को C, D और E ग्रेड मिलेगा, उनकी पढ़ाई पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। शिक्षकों को निर्देश दिया जाएगा कि ऐसे बच्चों के लिए अतिरिक्त शैक्षणिक सहायता, अभ्यास और मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाए, ताकि वे भी बेहतर प्रदर्शन कर सकें और भविष्य में A या B ग्रेड की श्रेणी में आ सकें। इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी छात्र पढ़ाई में पीछे न रह जाए।
नई शिक्षा नीति के तहत बदलाव
यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत शिक्षा में सुधार के प्रयासों का हिस्सा है। पिछले कुछ वर्षों में बिहार की स्कूली शिक्षा प्रणाली में कई बदलाव किए गए हैं। कक्षाओं में पढ़ाई और मूल्यांकन के दौरान बच्चों के बीच बढ़ती शैक्षणिक असमानता को देखते हुए शिक्षा विभाग ने यह नई ग्रेडिंग व्यवस्था लागू करने का फैसला लिया है।
माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर पर भी प्रस्ताव
शुरुआत में यह व्यवस्था केवल प्रारंभिक विद्यालयों में लागू की जाएगी, लेकिन भविष्य में इसे माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में भी लागू करने का प्रस्ताव है। इससे पूरे राज्य की शिक्षा व्यवस्था में एक समान और व्यवस्थित मूल्यांकन प्रणाली विकसित हो सकेगी।
बच्चों को उनके प्राप्त अंकों के आधार पर ग्रेड दिया जाएगा
81 से 100 प्रतिशत अंक – A ग्रेड
61 से 80 प्रतिशत अंक – B ग्रेड
41 से 60 प्रतिशत अंक – C ग्रेड
33 से 40 प्रतिशत अंक – D ग्रेड
0 से 32 प्रतिशत अंक – E ग्रेड

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