केंद्र सरकार की नई पहल, नौकरीपेशा लोगों को 3 बड़ी खुशखबरी

नई दिल्ली। नौकरीपेशा लोगों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) उनकी बचत का एक महत्वपूर्ण आधार होती है। हर महीने वेतन से एक निश्चित राशि कटकर इस खाते में जमा होती है, जिसमें उतनी ही रकम नियोक्ता यानी कंपनी की ओर से भी जोड़ी जाती है। इस जमा राशि पर सरकार की ओर से ब्याज दिया जाता है, जिससे कर्मचारियों की लंबी अवधि की बचत मजबूत होती है।

हाल ही में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी EPFO के केंद्रीय न्यासी बोर्ड ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ईपीएफ पर मिलने वाली ब्याज दर को 8.25 प्रतिशत बनाए रखने की सिफारिश की है। यह दर पिछले वित्त वर्ष के समान ही रखी गई है। हालांकि इसे लागू करने के लिए अभी केंद्र सरकार की आधिकारिक अधिसूचना जारी होना बाकी है। अधिसूचना जारी होने के बाद ही ईपीएफओ अपने सदस्यों के खातों में ब्याज की राशि जमा करेगा।

कब मिलेगा खाताधारकों को ब्याज

ब्याज दर की घोषणा के बाद खातों में रकम जमा होने में आमतौर पर कुछ समय लगता है। पिछले वर्षों के अनुभव के आधार पर देखा जाए तो इस प्रक्रिया को पूरा होने में लगभग 3 से 6 महीने का समय लग सकता है। यानी जैसे ही केंद्र सरकार इस दर को नोटिफाई करेगी, उसके बाद तकनीकी प्रक्रिया पूरी कर लाखों खातों में ब्याज जोड़ दिया जाएगा।

ऐसे चेक करें अपना EPF बैलेंस

ईपीएफ खाताधारक कई आसान तरीकों से अपने खाते की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। UMANG App के जरिए लॉग इन कर बैलेंस देखा जा सकता है। EPF Member e‑Sewa Portal पर जाकर भी अकाउंट डिटेल्स चेक की जा सकती हैं। इसके अलावा मिस्ड कॉल और एसएमएस सेवा के माध्यम से भी ईपीएफ खाते की जानकारी हासिल करना संभव है।

छोटे निष्क्रिय खातों के लिए नई व्यवस्था

ईपीएफओ ने 1,000 रुपये या उससे कम राशि वाले निष्क्रिय खातों के लिए एक नई पायलट परियोजना को भी मंजूरी दी है। इस व्यवस्था के तहत ऐसे खातों के क्लेम का ऑटोमैटिक सैटलमेंट किया जाएगा। इस योजना में लगभग 1.33 लाख से अधिक खातों को शामिल किया जाएगा, जिनकी कुल राशि करीब 5.68 करोड़ रुपये है।

कर्मचारियों के हित में एक और फैसला

संगठन ने कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा और विवादों के त्वरित समाधान के लिए एक विशेष अभयदान योजना को भी मंजूरी दी है। यह योजना उन नियोक्ता प्रतिष्ठानों से जुड़े अनुपालन मामलों को सुलझाने में मदद करेगी, जिन्हें अब तक पूरी तरह से संबंधित कानून के तहत कवर नहीं किया गया था।

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