इस परियोजना के पूरा होने से न केवल परिवहन सुविधाएं बेहतर होंगी, बल्कि क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास को भी नई दिशा मिलेगी।
वर्षों पुरानी मांग को मिला आकार
इस रेललाइन की घोषणा वर्ष 2018 में की गई थी और इसे 2024-25 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। हालांकि, विभिन्न कारणों से परियोजना की रफ्तार धीमी रही। अब प्रशासन ने इसे गति देने के लिए भूमि अधिग्रहण और सर्वे कार्य में तेजी लानी शुरू कर दी है।
118 गांवों से होकर गुजरेगी रेल
प्रस्तावित रेललाइन तीन जिलों के करीब 118 गांवों से होकर गुजरेगी। खास बात यह है कि श्रावस्ती जैसे जिले, जो अब तक रेलवे नेटवर्क से पूरी तरह जुड़े नहीं हैं, पहली बार सीधी रेल सुविधा से जुड़ेंगे। इससे स्थानीय लोगों के लिए आवागमन आसान होगा और व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
भूमि अधिग्रहण और मुआवजा प्रक्रिया
परियोजना के तहत कई इलाकों में भूमि अधिग्रहण का काम चल रहा है। बहराइच जिले में कई गांवों के किसानों को मुआवजा दिया जा चुका है और बड़ी मात्रा में जमीन अधिग्रहित हो चुकी है। वहीं श्रावस्ती में भी अधिग्रहण की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है।
किन-किन मार्गों से जुड़ेगा रेल नेटवर्क
यह रेललाइन खलीलाबाद से शुरू होकर मेहदावल, डुमरियागंज, उतरौला और बलरामपुर होते हुए श्रावस्ती के भिनगा तक पहुंचेगी, और आगे बहराइच जिले से जुड़ेगी। इस रूट से कई छोटे कस्बे और ग्रामीण इलाके पहली बार मुख्य रेल नेटवर्क से जुड़ जाएंगे।
रेल लाइन के लिए सर्वे और निर्माण की स्थिति
कुछ इलाकों में ड्रोन सर्वे पूरा हो चुका है, जबकि कई गांवों में अभी सर्वे जारी है। प्रशासन का कहना है कि जैसे ही भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होगी, निर्माण कार्य को अगले चरण में ले जाया जाएगा। इस परियोजना से कृषि उत्पादों और स्थानीय कारोबार को बड़े बाजारों तक पहुंचने में आसानी होगी। बेहतर कनेक्टिविटी से शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच भी मजबूत होगी।

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