1. उर्वरक उत्पादन बढ़ाने के लिए अतिरिक्त गैस की व्यवस्था
सरकार ने घरेलू स्तर पर उर्वरक उत्पादन को बढ़ाने के लिए प्राकृतिक गैस की आपूर्ति में इजाफा किया है। एम्पावर्ड पूल मैनेजमेंट कमिटी (EPMC) के जरिए अंतरराष्ट्रीय बाजार से स्पॉट खरीद कर अतिरिक्त गैस हासिल की गई है। इससे देश के यूरिया प्लांट्स को मिलने वाली गैस की मात्रा बढ़ गई है।
पहले जहां लगभग 32 MMSCMD गैस की सप्लाई हो रही थी, अब यह बढ़कर करीब 39.31 MMSCMD तक पहुंच गई है। इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ा है, यूरिया उत्पादन में लगभग 23% तक की बढ़ोतरी का अनुमान है। यानी अब देश में प्रतिदिन 54,500 मीट्रिक टन की जगह करीब 67,000 मीट्रिक टन यूरिया का उत्पादन हो रहा है। यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे भारत की आयात पर निर्भरता कम होगी और किसानों को समय पर खाद मिल सकेगी।
2. उर्वरकों का रिकॉर्ड स्तर पर भंडारण और वैश्विक खरीद
सरकार ने सिर्फ उत्पादन बढ़ाने पर ही ध्यान नहीं दिया, बल्कि उर्वरकों का पर्याप्त भंडार भी सुनिश्चित किया है। पिछले साल की तुलना में इस साल खाद का स्टॉक काफी ज्यादा है। मार्च 2025 में जहां कुल उर्वरक भंडार 138.79 लाख मीट्रिक टन (LMT) था, वहीं इस साल यह बढ़कर 180.04 LMT हो गया है, यानी लगभग 30% की बढ़ोतरी। खास बात यह है कि डीएपी (DAP) का स्टॉक तो लगभग दोगुना हो गया है।
इसके अलावा सरकार ने समय रहते ग्लोबल टेंडर जारी कर दिए हैं, जिससे विभिन्न देशों से उर्वरकों की आपूर्ति सुनिश्चित हो रही है। उम्मीद है कि मार्च के अंत तक अधिकतर ऑर्डर भारत पहुंच जाएंगे, जिससे खरीफ सीजन के दौरान किसी भी तरह की कमी नहीं होगी।
किसानों के लिए क्या है फायदा?
इन दोनों फैसलों का सीधा लाभ किसानों को मिलेगा।
खरीफ सीजन में खाद की कमी नहीं होगी।
कीमतों पर नियंत्रण बना रहेगा।
खेती की लागत बढ़ने का खतरा कम होगा।
उत्पादन में स्थिरता बनी रहेगी।
.png)
0 comments:
Post a Comment