दिल्ली में हुई अहम बैठक
भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक गुरुवार को दिल्ली में आयोजित की गई। यह बैठक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधिकारिक आवास 7 लोक कल्याण मार्ग पर हुई। आमतौर पर इस तरह की बैठकों का आयोजन पार्टी मुख्यालय में होता है, लेकिन इस बार इसे प्रधानमंत्री के आवास पर आयोजित किया गया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक बैठक में पश्चिम बंगाल चुनाव के लिए करीब 140 उम्मीदवारों के नामों पर सहमति बन चुकी है। माना जा रहा है कि पार्टी जल्द ही उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर सकती है।
अप्रैल के अंत तक चुनाव की संभावना
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि राज्य में चुनाव अप्रैल के आखिर तक कराए जा सकते हैं। ऐसे में सभी दलों ने अपनी रणनीति को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। पश्चिम बंगाल में कुल 294 विधानसभा सीटें हैं और भाजपा लगभग आधी सीटों पर उम्मीदवार तय करने की दिशा में आगे बढ़ चुकी है।
इस बार बीजेपी की 2021 से बदली रणनीति
भाजपा ने इस बार अपनी रणनीति में कुछ अहम बदलाव किए हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में पार्टी ने कई ऐसे नेताओं और फिल्मी हस्तियों को टिकट दिया था, जो बाद में पार्टी छोड़कर दूसरे दलों में चले गए। इसी अनुभव को ध्यान में रखते हुए इस बार पार्टी ने दलबदल कर आने वाले नेताओं और सिलेब्रिटी चेहरों को कम प्राथमिकता देने का फैसला किया है।
पुराने कार्यकर्ताओं पर बीजेपी का ज्यादा भरोसा
पार्टी नेतृत्व का मानना है कि लंबे समय से संगठन के साथ जुड़े और वफादार कार्यकर्ताओं को मौका देने से कैडर का मनोबल बढ़ेगा। साथ ही इससे जनता के बीच यह संदेश भी जाएगा कि पार्टी में जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं को सम्मान दिया जाता है।
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावी अभियान भी शुरू
भाजपा ने राज्य में चुनावी माहौल बनाने के लिए प्रचार अभियान भी तेज कर दिया है। हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक जनसभा में वादा किया कि अगर भाजपा राज्य में सत्ता में आती है तो सरकारी कर्मचारियों के लिए सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू की जाएंगी।
बंगाल की सत्ता किसके हाथ, मुख्य विपक्ष के रूप में भाजपा
साल 2021 West Bengal Legislative Assembly election में भाजपा ने 77 सीटें जीतकर राज्य में मुख्य विपक्षी दल के रूप में जगह बनाई थी। हालांकि बाद में कुछ विधायकों के पार्टी छोड़ने के कारण विधानसभा में पार्टी की संख्या घट गई। आने वाले चुनाव में भाजपा सत्ता हासिल करने की पूरी कोशिश में जुटी है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि पश्चिम बंगाल की जनता इस बार किसे सत्ता की जिम्मेदारी सौंपती है।

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