रजिस्ट्री से पहले दस्तावेजों की जांच होगी अनिवार्य
नए प्रस्ताव के अनुसार अब किसी भी संपत्ति की रजिस्ट्री से पहले उसके स्वामित्व और खतौनी से जुड़े दस्तावेजों की जांच जरूरी होगी। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि जिस व्यक्ति द्वारा जमीन बेची जा रही है, वही उसका वास्तविक मालिक है। सरकार का मानना है कि कई मामलों में असली मालिक के अलावा कोई अन्य व्यक्ति जमीन बेच देता है या विवादित संपत्ति का भी पंजीकरण करा लिया जाता है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद ऐसे मामलों को पहले ही चरण में रोका जा सकेगा।
मौजूदा कानून में सीमित थे अधिकार
फिलहाल रजिस्ट्री की प्रक्रिया Registration Act, 1908 के तहत संचालित होती है। इस कानून के तहत उप-निबंधक के पास संदिग्ध मामलों में पंजीकरण रोकने के बहुत सीमित अधिकार होते हैं। इसी वजह से कई बार विवादित या प्रतिबंधित संपत्तियों की रजिस्ट्री भी हो जाती है। इन समस्याओं को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने कानून और उससे जुड़े नियमों में संशोधन करने का फैसला लिया है।
कानून में जोड़ी जाएंगी नई धाराएं
प्रस्तावित संशोधन के तहत रजिस्ट्रेशन कानून में कुछ नई धाराएं जोड़ी जाएंगी। इनमें धारा 22-A, 22-B और 35-A शामिल होंगी।
धारा 22-A: कुछ विशेष श्रेणियों की संपत्तियों के पंजीकरण पर रोक लगाने का प्रावधान होगा।
धारा 22-B: संपत्ति की पहचान और उससे जुड़े विवरण की पुष्टि की जाएगी।
धारा 35-A: यदि रजिस्ट्री के समय स्वामित्व, कब्जे या अधिकार से जुड़े आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं होंगे तो पंजीकरण अधिकारी रजिस्ट्री से इनकार कर सकेगा। इन प्रावधानों के लागू होने से संपत्ति के दस्तावेजों की जांच और सत्यापन पहले से ज्यादा सख्त हो जाएगा।
फर्जीवाड़े और विवादों पर लगेगी रोक
सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जमीन बेचने के मामलों में काफी कमी आएगी। साथ ही आम लोगों को लंबे समय तक चलने वाले कोर्ट केस और कानूनी विवादों से भी राहत मिलेगी।

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