भारत बना रहा घातक ड्रोन, हवा और पानी दोनों में करेगा काम

नई दिल्ली। भारत का डीप-टेक स्टार्टअप इकोसिस्टम तेजी से नए रक्षा तकनीकी समाधान विकसित कर रहा है। इसी कड़ी में भारतीय स्टार्टअप AquaAirX ने एक उभयचर (एयर-वॉटर) ड्रोन “Avataar” का पहला कार्यशील प्रोटोटाइप पेश किया है। यह अत्याधुनिक ड्रोन हवा में उड़ान भरने के साथ-साथ पानी के भीतर भी ऑपरेशन करने की क्षमता रखता है। इस वजह से इसे समुद्री निगरानी और सामरिक मिशनों के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

दो वातावरण में काम करने की क्षमता

अवतार ड्रोन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह दो अलग-अलग वातावरण में काम कर सकता है। इसे हवा से लॉन्च किया जा सकता है, जिसके बाद यह समुद्र की सतह पर उतरकर पानी के भीतर मिशन पूरा कर सकता है। मिशन समाप्त होने के बाद यह फिर से पानी से उड़ान भरकर हवा में आ जाता है और अगली लोकेशन तक पहुंच सकता है। इस तरह की क्षमता पारंपरिक ड्रोन या अंडरवॉटर वाहनों में आम तौर पर नहीं होती।

निगरानी और सुरक्षा मिशनों के लिए

इस ड्रोन को खास तौर पर ऑटोनॉमस टैक्टिकल एरियल एंड एक्वाटिक रिकॉनिसेंस के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकॉनिसेंस (ISR) से जुड़े उपकरण लगाए जा सकते हैं। इसके अलावा इसमें सोनार सिस्टम और एकॉस्टिक सेंसर जैसे उपकरण भी जोड़े जा सकते हैं, जिससे समुद्र के भीतर की गतिविधियों का पता लगाया जा सके।

पेलोड क्षमता और मिशन रेंज

अवतार ड्रोन लगभग 10 किलोग्राम तक का पेलोड ले जाने में सक्षम बताया जा रहा है। इसे करीब 175 नॉटिकल मील की अधिकतम रेंज और लगभग 5 घंटे तक लगातार मिशन पर रहने के लक्ष्य के साथ विकसित किया जा रहा है। इस क्षमता के कारण यह लंबी दूरी की समुद्री निगरानी और सुरक्षा अभियानों में उपयोगी साबित हो सकता है।

शुरुआती परीक्षण सफल

ड्रोन का प्रारंभिक परीक्षण पूल ट्रायल के रूप में किया गया, जिसमें यह जांचा गया कि ड्रोन हवा और पानी के बीच कितनी आसानी से ट्रांजिशन कर सकता है। परीक्षण के दौरान इसकी संरचनात्मक मजबूती, प्रोपल्शन सिस्टम और बेसिक ऑपरेशनल क्षमता की जांच की गई। शुरुआती नतीजे सकारात्मक बताए जा रहे हैं। अब इसे खुले समुद्र में और उन्नत हवाई परीक्षणों के लिए तैयार किया जा रहा है।

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