दो घंटे में बिजली नहीं आई तो मिलेगा मुआवजा
नई व्यवस्था के अनुसार यदि उपभोक्ता बकाया राशि जमा कर देता है और इसके बाद भी दो घंटे के भीतर बिजली आपूर्ति शुरू नहीं होती है, तो बिजली विभाग को प्रतिदिन 50 रुपये के हिसाब से मुआवजा देना पड़ेगा। इस नियम का उद्देश्य बिजली सेवाओं को अधिक जवाबदेह बनाना और उपभोक्ताओं को होने वाली परेशानी को कम करना है। यह प्रावधान उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग द्वारा बनाए गए यूपीईआरसी सेवा मानक विनियम 2019 में पहले से शामिल है, जिसे अब सख्ती से लागू करने की तैयारी की जा रही है।
बैलेंस खत्म होते ही कट जाता है कनेक्शन
स्मार्ट प्रीपेड मीटर प्रणाली में जैसे ही उपभोक्ता का बैलेंस खत्म होकर निगेटिव हो जाता है, बिजली की आपूर्ति अपने आप बंद हो जाती है। ऐसे में उपभोक्ता को तुरंत रिचार्ज या बकाया भुगतान करना पड़ता है। प्रदेश में बड़ी संख्या में उपभोक्ता अब इसी प्रणाली से जुड़े हुए हैं, इसलिए इस नियम का असर लाखों लोगों पर पड़ेगा।
लाखों उपभोक्ताओं पर दिख रहा निगेटिव बैलेंस
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा के अनुसार प्रदेश में लगभग 70 लाख से अधिक उपभोक्ताओं के खातों में निगेटिव बैलेंस दर्ज है। ऐसी स्थिति में यदि उपभोक्ता भुगतान करने के बाद भी समय पर बिजली नहीं पाते हैं तो उन्हें मुआवजा मिलना चाहिए।
समय पर भुगतान करने की अपील
उपभोक्ता परिषद ने लोगों से अपील की है कि जिन उपभोक्ताओं का बैलेंस निगेटिव में है, वे जल्द से जल्द भुगतान कर दें। समय पर रिचार्ज करने से बिजली आपूर्ति बाधित नहीं होगी और किसी प्रकार की असुविधा से भी बचा जा सकेगा।
उपभोक्ताओं को अधिकारों का लाभ
नई व्यवस्था लागू होने से बिजली विभाग की जिम्मेदारी बढ़ेगी और उपभोक्ताओं को बेहतर सेवा मिलने की उम्मीद है। साथ ही, यदि बिजली आपूर्ति में अनावश्यक देरी होती है तो उपभोक्ताओं को उसका मुआवजा भी मिल सकेगा।
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