सरकार के अनुसार कुछ कंपनियों ने पिछले वर्ष की तुलना में तीन से चार गुना अधिक बोली लगाकर बालू घाटों का ठेका लिया था। लेकिन बाद में यह कहकर घाटों को सरेंडर कर दिया कि कारोबार में मुनाफा नहीं हो रहा है। सरकार को आशंका है कि कुछ जगहों पर बालू माफियाओं की मिलीभगत से ऐसा किया गया।
मंत्री ने दी जानकारी
इस संबंध में जानकारी देते हुए उप-मुख्यमंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा ने बताया कि राजस्व को नुकसान पहुंचाने वाली करीब 78 कंपनियों को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि सरकार अवैध खनन और अनियमितताओं पर पूरी तरह सख्ती बरत रही है।
अवैध खनन की सूचना देने वालों को सम्मान
मंत्री ने बताया कि अवैध खनन और ओवरलोडिंग से जुड़े मामलों की सूचना देने वाले 71 लोगों को सम्मानित भी किया गया है। इन लोगों की पहचान सुरक्षा कारणों से सार्वजनिक नहीं की गई है। सरकार का कहना है कि ऐसे लोगों की मदद से अवैध खनन पर काफी हद तक नियंत्रण करने में सफलता मिली है।
सरेंडर किए गए घाटों का फिर होगा टेंडर
जिन बालू घाटों को कंपनियों ने बीच में छोड़ दिया है, उनकी समीक्षा करने की जिम्मेदारी जिलों में जिला पदाधिकारी की अध्यक्षता वाली टास्क फोर्स को दी गई है। समीक्षा के बाद इन घाटों के लिए नई निविदा प्रक्रिया शुरू की जाएगी और दरों में भी संशोधन किया जा सकता है।
बाहर से आने वाले खनिज वाहनों पर सख्ती
सरकार ने राज्य के बाहर से आने वाले खनिज लदे वाहनों के लिए ट्रांजिट चालान लेना अनिवार्य करने का फैसला भी किया है। सीमावर्ती जिलों में वाहनों की निगरानी को मजबूत किया जाएगा और बिना अनुमति प्रवेश करने वाले वाहनों पर कार्रवाई की जाएगी।

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