नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में सर्जियो गोर ने कहा कि दोनों देश उन खनिज संसाधनों की आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित करने के लिए समझौते को अंतिम रूप देने के करीब हैं, जो आधुनिक उद्योगों और नई तकनीकों के विकास के लिए जरूरी हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले कुछ महीनों में इस संबंध में एक बड़ी घोषणा की जा सकती है।
तकनीक और ऊर्जा क्षेत्र को मिलेगा लाभ
क्रिटिकल मिनरल्स आज की वैश्विक अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनका उपयोग उन्नत विनिर्माण, स्वच्छ ऊर्जा प्रणालियों, बैटरी निर्माण और उभरती तकनीकों में किया जाता है। ऐसे में भारत और अमेरिका के बीच यह संभावित समझौता दोनों देशों की औद्योगिक और तकनीकी क्षमताओं को मजबूत कर सकता है।
नई ऊंचाइयों पर पहुंच सकते हैं संबंध
सर्जियो गोर ने यह भी कहा कि वाशिंगटन और नई दिल्ली के बीच संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं और भविष्य में यह साझेदारी ऐतिहासिक ऊंचाइयों तक पहुंच सकती है। उन्होंने हाल के वर्षों में व्यापार, प्रौद्योगिकी और रणनीतिक सहयोग के क्षेत्र में हुई प्रगति को इसका प्रमुख कारण बताया।
व्यापार और तकनीकी सहयोग में बढ़ोतरी
राजदूत ने इस दौरान भारत-अमेरिका के अंतरिम व्यापार समझौते का भी जिक्र किया। उनके अनुसार दोनों देशों की बड़ी अर्थव्यवस्था, प्रतिभाशाली मानव संसाधन और उद्यमशीलता की भावना इस साझेदारी को और मजबूत बनाती है। उन्होंने कहा कि अब दोनों सरकारें अवसरों को वास्तविक परिणामों में बदलने के लिए तेजी से कदम उठा रही हैं।

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