यूपी में किसानों की बल्ले-बल्ले: गेहूं खरीद में आई तेजी, सरकार ने बढ़ाया लक्ष्य

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में किसानों के लिए इस समय राहत भरी खबरें सामने आ रही हैं। बेमौसम बारिश के कारण शुरुआत में धीमी रही गेहूं खरीद प्रक्रिया अब रफ्तार पकड़ चुकी है। सरकारी खरीद केंद्रों पर गतिविधियां बढ़ गई हैं और किसानों को उनकी उपज का भुगतान तेजी से किया जा रहा है, जिससे उनके बीच भरोसा और उत्साह दोनों बढ़े हैं।

गेहूं खरीद में तेजी, हजारों किसानों को मिला भुगतान

राज्य में रबी विपणन वर्ष 2026-27 के तहत 1 अप्रैल से गेहूं खरीद शुरू हुई थी, जो 15 जून तक चलेगी। शुरुआती सुस्ती के बाद अब खरीद में तेजी देखी जा रही है। अब तक हजारों किसानों को एमएसपी के तहत लगभग 130 करोड़ रुपये का भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में भेजा जा चुका है। इससे किसानों को आर्थिक राहत मिली है और मंडियों में भी गतिविधियां बढ़ी हैं।

MSP में बढ़ोतरी से किसानों को फायदा

इस साल सरकार ने गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2585 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है, जो पिछले साल की तुलना में 160 रुपये अधिक है। इससे किसानों को उनकी उपज का बेहतर दाम मिल रहा है और उनकी आय में सुधार की उम्मीद बढ़ी है।

प्रदेशभर में 6500 खरीद केंद्र सक्रिय

गेहूं खरीद को आसान और पारदर्शी बनाने के लिए राज्य सरकार ने पूरे प्रदेश में लगभग 6500 खरीद केंद्र स्थापित किए हैं। इन केंद्रों पर सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक खरीद की जा रही है। खाद्य विभाग और कई अन्य एजेंसियां मिलकर इस प्रक्रिया को संचालित कर रही हैं, ताकि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

रिकॉर्ड पंजीकरण और बढ़ती खरीद

अब तक 4 लाख से अधिक किसानों ने गेहूं बिक्री के लिए पंजीकरण कराया है, जिससे आने वाले दिनों में खरीद और तेज होने की संभावना है। अभी तक 98,079 मीट्रिक टन से अधिक गेहूं की खरीद पूरी हो चुकी है, जो आगे और बढ़ने की उम्मीद है।

अतिरिक्त राहत और बढ़ा लक्ष्य

इस बार किसानों को गेहूं की सफाई, छनाई और उतराई के लिए 20 रुपये प्रति क्विंटल अतिरिक्त भी दिए जा रहे हैं। बेहतर उत्पादन को देखते हुए सरकार ने खरीद लक्ष्य को भी 30 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 50 लाख मीट्रिक टन कर दिया है।

सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसानों को 48 घंटे के भीतर डीबीटी के माध्यम से भुगतान किया जाए। साथ ही खरीद केंद्रों पर पेयजल, छाया और बैठने जैसी मूलभूत सुविधाएं भी सुनिश्चित की गई हैं, ताकि किसानों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

0 comments:

Post a Comment