‘बाहरी नियंत्रण’ का आरोप
प्रशांत किशोर ने इस फैसले को बिहार के आत्मसम्मान से जोड़ते हुए कहा कि राज्य की सत्ता अब स्थानीय स्तर पर नहीं, बल्कि बाहर से संचालित होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि यह बदलाव केवल नेतृत्व परिवर्तन नहीं, बल्कि राजनीतिक नियंत्रण की दिशा में बड़ा संकेत है।
भाजपा के नारे पर साधा निशाना
किशोर ने भाजपा के पुराने नारे ‘चाल, चरित्र और चेहरा’ पर तंज कसते हुए कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में यह नारा खुद सवालों के घेरे में खड़ा नजर आता है। उन्होंने कहा कि जनता को अब इन तीनों पहलुओं पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
‘सत्ता की चाबी’ पर उठे सवाल
बिना सीधे नाम लिए उन्होंने संकेत दिया कि मुख्यमंत्री पद पर कौन बैठा है, इससे ज्यादा अहम यह है कि वास्तविक निर्णय लेने की ताकत किसके पास है। इस संदर्भ में उन्होंने अमित शाह की ओर इशारा करते हुए कहा कि राज्य की सत्ता का असली नियंत्रण केंद्र के हाथों में हो सकता है।
युवाओं के भविष्य पर चिंता
प्रशांत किशोर ने आर्थिक मुद्दों को भी उठाते हुए कहा कि मौजूदा नीतियों से बिहार के युवाओं को राज्य के बाहर काम करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। उन्होंने आशंका जताई कि रोजगार के बेहतर अवसर न मिलने पर युवा दूसरे राज्यों में कम वेतन पर काम करने को विवश होंगे।

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