सिर्फ कागजी लाभ, आर्थिक लाभ नहीं
यह व्यवस्था केवल कागजी (नोशनल) प्रमोशन के लिए लागू होगी। इसका अर्थ है कि संविदा सेवा को प्रमोशन की गणना में जोड़ा जाएगा, लेकिन इससे वेतन, पेंशन या किसी अन्य आर्थिक लाभ में कोई बदलाव नहीं होगा। प्रमोशन के बाद वेतन केवल वास्तविक प्रमोशन की तारीख से ही लागू होगा।
समिति के माध्यम से समीक्षा
इस निर्णय को लागू करने के लिए चार सदस्यीय समिति का गठन किया गया है, जिसकी अध्यक्षता उच्च शिक्षा निदेशक करेंगे। समिति को इस मामले पर 15 दिन के भीतर रिपोर्ट तैयार करनी है।
किन कर्मचारियों पर लागू होगी
यह सुविधा उन प्रवक्ताओं के लिए है, जो वर्ष 2005-06, 2006-07 और 2008-09 में संविदा पर नियुक्त हुए और बाद में 26 दिसंबर 2016 के शासनादेश के तहत नियमित किए गए। इनके काम की अवधि पहले ही निरंतर मानी जा चुकी है।
नियमों और शर्तों का आधार
प्रमोशन में संविदा सेवा को जोड़ने का निर्णय UGC 2010 और 2018 के दिशा-निर्देशों के अनुरूप लिया गया है। इसमें यह स्पष्ट किया गया है कि सेवा चाहे सरकारी, निजी या स्थानीय संस्थान में की गई हो, उसमें कोई भेदभाव नहीं होगा। हालांकि, संविदा सेवा केवल रिकॉर्ड में शामिल होगी और इससे वरिष्ठता या आर्थिक लाभ नहीं जुड़ेगा।

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