खास महाल की जमीनों को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि लीज की शर्तों का पालन नहीं हो रहा है। कुछ मामलों में तो स्वामित्व का परिवर्तन भी कर लिया गया है, जो नियमों के खिलाफ है। सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए अब सख्त रुख अपनाया है।
राज्य सरकार ने फरवरी 2022 में ही खास महाल जमीन के सर्वेक्षण का आदेश दिया था। सभी जिलों के डीएम को जिम्मेदारी दी गई थी कि वे लीज और स्वामित्व विवाद की जांच करें। निर्देश दिए गए थे कि जहां लीज वैध है, वहां नवीकरण किया जाए, और जहां अनियमितता मिले, वहां लीज रद्द कर जमीन का अधिग्रहण किया जाए।
हालांकि, अब तक इस अभियान में खास सफलता नहीं मिली है। इसलिए सरकार ने अब इस अभियान को तेज करने का निर्णय लिया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अनुसार, इस बार जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता लाई जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। जिन लोगों ने खास महाल जमीन पर अवैध कब्जा कर रखा है या लीज की शर्तों का उल्लंघन किया है, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई तय मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम न केवल सरकारी जमीन को बचाने में मदद करेगा, बल्कि लंबे समय से चली आ रही जमीन से जुड़ी गड़बड़ियों को भी खत्म करेगा। अब देखने वाली बात होगी कि सरकार इस बार इस अभियान को कितनी प्रभावी ढंग से अंजाम देती है।

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