धार्मिक व्यवस्था होगा मजबूत
परिषद के अध्यक्ष रणबीर नंदन के अनुसार, राज्य में कुल 2,499 मंदिर और मठ परिषद में पंजीकृत हैं। इन्हीं धार्मिक स्थलों को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक जिले में एक-एक संयोजक नियुक्त किया जाएगा। चयन प्रक्रिया शीघ्र ही आरंभ होगी और यह नियुक्ति केवल महंतों तथा मुख्य पुजारियों में से ही की जाएगी, ताकि धार्मिक गतिविधियों की बेहतर समझ रखने वाले लोग इस जिम्मेदारी को निभा सकें। संयोजक अपने-अपने जिलों के धार्मिक स्थलों में होने वाले कार्यक्रमों की निगरानी, संचालन और योजनाओं के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी संभालेंगे। इससे मंदिरों की व्यवस्थाएं अधिक सुव्यवस्थित और सक्रिय होने की उम्मीद है।
पूर्णिमा और अमावस्या पर अनिवार्य पूजा
परिषद ने यह भी स्पष्ट किया है कि सभी पंजीकृत मंदिरों और मठों में प्रत्येक पूर्णिमा को सत्यनारायण कथा और अमावस्या को भगवती पूजा अनिवार्य रूप से आयोजित की जाएगी। संयोजक इन पूजा-पद्धतियों के महत्व को लोगों तक पहुँचाने और आम नागरिकों को अपने घरों में भी इस परंपरा को अपनाने के लिए प्रेरित करेंगे। इसका उद्देश्य धार्मिक जागरूकता बढ़ाना और सामाजिक एकजुटता को प्रोत्साहित करना है।
सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए समर्पित स्थान
धार्मिक न्यास परिषद ने निर्देश दिया है कि सभी मंदिरों और मठों में अखाड़ाओं की पारंपरिक गतिविधियों के लिए एक विशेष स्थान निर्धारित किया जाए। परिषद का मानना है कि धार्मिक स्थल केवल पूजा-अर्चना की जगह नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक सुधारों के माध्यम भी हैं। अखाड़ों की उपस्थिति से युवाओं को पारंपरिक शारीरिक कलाओं से जोड़ने, अनुशासन बढ़ाने और सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखने में मदद मिलेगी।
छठ पूजा को वैश्विक पहचान दिलाने की पहल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा छठ पूजा को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल करवाने के प्रयासों का उल्लेख करते हुए परिषद ने कहा कि बिहार के लिए यह गौरव की बात है। छठ पूजा बिहार की आस्था, संस्कृति और सामुदायिक सद्भाव का अद्भुत प्रतीक है। परिषद का मानना है कि इस त्योहार को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उचित पहचान मिले, इसके लिए राज्य सरकार हर संभव सहयोग करेगी।
राजगीर में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन और धार्मिक कैलेंडर जारी होगा
परिषद निकट भविष्य में राजगीर में सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार पर केंद्रित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करेगी। इसमें भारत सहित विभिन्न देशों के विद्वान, धर्माचार्य और सांस्कृतिक विशेषज्ञ हिस्सा ले सकते हैं। इसके अतिरिक्त, एक विशेष धार्मिक कैलेंडर जारी किया जाएगा, जिसमें सनातन धर्म से जुड़े प्रमुख त्योहारों, पूजा-विधियों और वार्षिक धार्मिक गतिविधियों को विस्तृत रूप से शामिल किया जाएगा। यह कैलेंडर सभी मंदिरों और मठों के माध्यम से पूरे बिहार में वितरित किया जाएगा।

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