कर्मचारियों की 7 बड़ी मांगें, मान ली गईं तो होगी बल्ले-बल्ले?

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने हाल ही में 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के लिए टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) जारी कर दिए हैं। लेकिन ToR जारी होते ही केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के बीच कई सवाल खड़े हो गए। जिसमे सबसे बड़ा मुद्दा 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें कब से लागू होंगी?

तारीख क्यों बनी विवाद का कारण?

अब तक हर वेतन आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी से लागू होती आई हैं। 7वें वेतन आयोग की अवधि 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हो रही है, इसलिए माना जा रहा था कि 8वाँ आयोग 1 जनवरी 2026 से लागू होगा। लेकिन ToR में लागू होने की तारीख का स्पष्ट ज़िक्र नहीं है, जिससे कर्मचारियों और पेंशनर्स के बीच आशंका बनी हुई है।

PM और FM को संगठनों ने भेजे पत्र

ToR का अध्ययन करने के बाद कई प्रमुख संगठनों AIDEF, CCGEW, भारत पेंशनर्स समाज (BPS) ने प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री को विस्तृत पत्र भेजकर ToR में बदलाव की मांग की है। NC-JCM ने भी अपनी आपत्तियाँ दर्ज कराते हुए सुधारों का मसौदा सरकार को भेजा है।

7 प्रमुख बिंदु, जिन पर बदलाव की मांग

कर्मचारी व पेंशनर संगठनों ने कुल 7 महत्वपूर्ण सुधार सुझाए हैं। अगर ये मान लिए जाते हैं, तो यह कदम लाखों कर्मचारियों और करोड़ों पेंशनर्स के लिए बड़े राहतकारी साबित हो सकते हैं।

1. 8वें वेतन आयोग की लागू होने की तारीख का स्पष्ट उल्लेख

संगठन चाहते हैं कि ToR में साफ लिखा जाए कि 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से ही लागू होंगी। तारीख गायब होने से संदेह और असमंजस बना हुआ है।

2. ‘Unfunded Cost’ शब्द हटाया जाए

ToR में प्रयुक्त Unfunded Cost शब्द संगठन को स्वीकार्य नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने पेंशन को संवैधानिक अधिकार माना है, इसलिए पेंशन को बोझ के रूप में बताने वाले शब्द हटाने की मांग उठी है।

3. OPS–NPS–UPS की व्यापक समीक्षा

2004 के बाद नियुक्त 26 लाख से अधिक कर्मचारी पुरानी पेंशन (OPS) बहाल करने की मांग कर रहे हैं। BPS चाहता है कि 8वाँ वेतन आयोग OPS, NPS, UPS सभी पेंशन प्रणालियों की समीक्षा कर ठोस सिफारिशें दे।

4. पेंशन समानता के नियम स्पष्ट हों

संगठन चाहता है कि पुराने और नए पेंशनर्स के बीच अंतर खत्म करने के लिए एक समान सिद्धांत लागू किया जाए। तारीख के आधार पर पेंशन में भेदभाव खत्म हो।

5. ग्रामीण डाक सेवक (GDS) और स्वायत्त निकायों को शामिल किया जाए

GDS, ऑटोनोमस संस्थाओं और सांविधिक निकायों को 8वें वेतन आयोग के दायरे में शामिल करने की मांग की गई है। इन कर्मचारियों का लंबे समय से यह मुद्दा लंबित है।

6. महंगाई के दबाव को देखते हुए 20% अंतरिम राहत

संगठन का कहना है कि आने वाले वेतन आयोग की प्रतीक्षा के बजाय कर्मचारियों और पेंशनर्स को तुरंत 20% अंतरिम राहत दी जाए। बढ़ती महंगाई का दबाव लगातार बढ़ रहा है।

7. CGHS में बड़े सुधार, कैशलेस इलाज और नए केंद्र

CGHS से जुड़ी समस्याओं को उठाते हुए संगठन ने मांग की है कि: नए CGHS केंद्र खोले जाएँ, कैशलेस इलाज की सुविधा विस्तार से लागू हो, लंबित संसदीय समिति की सिफारिशें लागू की जाएँ।

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