NC JCM के सचिव शिव गोपाल मिश्रा ने कहा है कि प्रस्तावित संशोधन कर्मचारियों, रक्षाकर्मियों और पेंशनर्स के हितों को सुरक्षित करेंगे। सरकार पहले ही 8वें वेतन आयोग की घोषणा कर चुकी है और ToR पर मुहर भी लगा चुकी है, ऐसे में परिषद का यह पत्र खास महत्व रखता है।
कौन-कौन से बड़े बदलावों की मांग उठी है?
परिषद ने 8वें वेतन आयोग के ToR में कई प्रमुख बिंदु जोड़ने की मांग रखी है:
1. 'हितधारकों की अपेक्षाएँ' वाला खंड दोबारा शामिल किया जाए
7वें वेतन आयोग के ToR में यह महत्वपूर्ण हिस्सा था, लेकिन इस बार हटा दिया गया है। परिषद का कहना है कि इस बदलाव से कर्मचारियों का विश्वास कमजोर होता है।
2. पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली
लगभग 26 लाख NPS कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना लागू करने की मांग नया वेतन आयोग देखकर फिर से जोर पकड़ चुकी है। यह मांग लंबे समय से पेंशन सुरक्षा को लेकर कर्मचारियों की चिंता को दर्शाती है।
3. सभी पेंशनर्स की पेंशन में संशोधन
ToR में पेंशन संशोधन का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। परिषद निम्न प्रावधान जोड़ने की मांग कर रही है। सेवानिवृत्ति के 11 साल बाद कम्यूटेशन बेनिफिट बहाल किया जाए, हर पाँच साल में पेंशन में 5% की बढ़ोतरी लागू की जाए, सभी पुराने पेंशनर्स को पेंशन संशोधन का लाभ मिले
4. ToR से कुछ शब्द हटाने की मांग
परिषद कहती है कि “गैर-योगदान वाली पेंशन योजनाओं की अप्रयुक्त लागत” जैसे शब्द पेंशन को वित्तीय बोझ दर्शाते हैं, जो कर्मचारी हितों के खिलाफ है।
5. 20% अंतरिम राहत देने का प्रस्ताव
नए आयोग की सिफारिशें लागू होने से पहले ही कर्मचारियों और पेंशनर्स को 20% अंतरिम राहत देने की मांग रखी गई है।
6. सिफारिशों की प्रभावी तारीख तय की जाए
NC JCM ने 1 जनवरी 2026 से नए वेतन आयोग की सिफारिशें लागू घोषित करने का सुझाव दिया है।
8वें वेतन आयोग को ToR की मंजूरी
केंद्रीय कैबिनेट पहले ही 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के ToR को मंजूरी दे चुकी है। इसके साथ ही आयोग का गठन भी कर दिया गया है। यह आयोग लगभग 50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और लगभग 69 लाख पेंशनर्स को प्रभावित करेगा। सरकार का कहना है कि आयोग 18 महीनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंप देगा।

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