केंद्र सरकार का 1 बड़ा फैसला: गेहूं-धान खरीद कमीशन में भारी बढ़ोतरी

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने कृषि क्षेत्र से जुड़े एक अहम फैसले में गेहूं और धान की सरकारी खरीद पर मिलने वाले कमीशन में बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। यह फैसला खास तौर पर उन राज्यों के लिए राहत लेकर आया है, जहां अनाज खरीद प्रणाली में आढ़तियों और सहकारी समितियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, जैसे पंजाब, हरियाणा और राजस्थान।

कब से लागू होंगी नई दरें?

यह संशोधित कमीशन दरें वर्ष 2026-27 के रबी विपणन सत्र (RMS) से लागू की जाएंगी। उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अनुसार यह निर्णय राज्य सरकारों की मांग और भारतीय खाद्य निगम सहित संबंधित संस्थाओं की सिफारिशों के आधार पर लिया गया है।

किसे कितना मिलेगा फायदा?

नई व्यवस्था के तहत कमीशन दरों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की गई है:

राजस्थान में यह दर 41.40 रुपये से बढ़कर 45.67 रुपये प्रति क्विंटल हो गई है। 

धान की खरीद पर कमीशन बढ़ाकर 50.61 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है। 

पंजाब और हरियाणा में गेहूं खरीद पर आढ़तियों का कमीशन बढ़ाकर 50.75 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है। 

सहकारी समितियों के लिए गेहूं पर कमीशन 27 रुपये से बढ़ाकर 29.79 रुपये और धान पर 32 रुपये से बढ़ाकर 35.30 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है। 

आधुनिक भंडारण को मिलेगा बढ़ावा

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि आधुनिक साइलो में होने वाली खरीद पर मंडी में लागू कमीशन का 50 प्रतिशत ही दिया जाएगा। इसका उद्देश्य आधुनिक भंडारण व्यवस्था को बढ़ावा देना और अनाज के बेहतर संरक्षण को सुनिश्चित करना है।

क्यों अहम है यह फैसला?

आढ़ती और सहकारी समितियां सरकार और किसानों के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी का काम करती हैं। वे मंडियों में तुलाई, सफाई, लोडिंग और अन्य जरूरी व्यवस्थाएं संभालते हैं। ऐसे में कमीशन में बढ़ोतरी से इनकी कार्यक्षमता और बेहतर होगी, जिसका सीधा लाभ किसानों को मिलेगा।

किसानों पर क्या होगा असर?

जानकारों का मानना है कि इस फैसले से खरीद प्रक्रिया और अधिक सुचारु और पारदर्शी बनेगी। रबी सीजन के दौरान जब गेहूं और धान की खरीद अपने चरम पर होती है, तब यह बढ़ोतरी किसानों को बेहतर सुविधाएं और समय पर भुगतान सुनिश्चित करने में मदद कर सकती है।

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