डॉलर के सामने लुढ़का रुपया, 92.42 के स्तर तक पहुंची गिरावट

नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय आर्थिक हालात के बीच भारतीय मुद्रा पर दबाव साफ दिखाई दे रहा है। मंगलवार को शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 92.42 के स्तर तक पहुंच गया। यह गिरावट दिखाती है कि फिलहाल रुपये के सामने कई बाहरी और घरेलू चुनौतियां एक साथ खड़ी हैं।

शुरुआती कारोबार में क्यों टूटा रुपया

इंटरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया हल्की कमजोरी के साथ खुला, लेकिन कुछ ही समय में गिरावट और बढ़ गई। पिछले कारोबारी दिन के मुकाबले इसमें और कमजोरी देखने को मिली, जिससे बाजार में सतर्कता का माहौल बन गया है।

कच्चे तेल की कीमतें बनीं बड़ी वजह

रुपये पर दबाव की सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में Brent Crude Oil की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में जब तेल महंगा होता है, तो देश का आयात बिल बढ़ता है और डॉलर की मांग तेज हो जाती है। इसका सीधा असर रुपये पर पड़ता है और वह कमजोर होने लगता है।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली का असर

रुपये की गिरावट के पीछे एक और अहम कारण विदेशी निवेशकों का पैसा निकालना है। Foreign Institutional Investors लगातार भारतीय बाजार से निवेश निकाल रहे हैं। जब एफआईआई शेयर बेचते हैं, तो वे रुपये को डॉलर में बदलते हैं। इससे बाजार में डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपया कमजोर हो जाता है। इसका असर शेयर बाजार पर भी दिखता है, जहां गिरावट का माहौल बन जाता है।

वैश्विक संकेत भी कर रहे प्रभावित

अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता और US Dollar Index की मजबूती भी रुपये पर दबाव बना रही है। जब डॉलर मजबूत होता है, तो उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राएं आमतौर पर कमजोर पड़ती हैं।

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