देश का धाकड़ फाइटर इंजन: Kaveri 2.0 पर काम शुरू

नई दिल्ली। भारत का सपना, खुद का फाइटर जेट इंजन बनाने का, अब फिर रफ्तार पकड़ता दिख रहा है। Gas Turbine Research Establishment (GTRE) ने Kaveri 2.0 इंजन पर काम तेज कर दिया है। यह प्रोजेक्ट मौजूदा GTX-35VS Kaveri इंजन की क्षमता को बढ़ाकर उसे सर्टिफाई करने पर केंद्रित है। आने वाले महीनों में इसका फ्लाइट टेस्ट किया जाएगा, जिससे इसकी वास्तविक प्रदर्शन और ताकत का आंकलन हो सके।

Kaveri 2.0 से क्या उम्मीदें हैं?

नए इंजन का शुरुआती वर्जन, जिसे Kaveri Derivative Engine (KDE) कहा जा रहा है, लगभग 49 kN थ्रस्ट देगा। इसके बाद इसका और ज्यादा ताकतवर संस्करण बनाया जाएगा, जिसमें आफ्टरबर्नर के साथ फ्लाइट टेस्ट HAL Tejas Mk1 पर किया जा सकता है। इससे न केवल इंजन की ताकत और स्थिरता जानी जाएगी, बल्कि ईंधन की खपत और गर्मी का भी परीक्षण होगा।

तकनीक और शक्ति में बढ़ोतरी

Kaveri 2.0 का एडवांस वर्जन बिना आफ्टरबर्नर के 55–59 kN और आफ्टरबर्नर के साथ लगभग 90 kN थ्रस्ट देने में सक्षम होगा। यह भारतीय फाइटर जेट प्रोजेक्ट्स के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

भारत के लिए बड़ा फायदा

अभी तक भारत को अपने फाइटर जेट्स के लिए विदेशी इंजनों पर निर्भर रहना पड़ता था। Kaveri 2.0 के सफल होने पर यह निर्भरता खत्म हो सकती है। इससे देश को तकनीकी आत्मनिर्भरता मिलेगी और स्वदेशी फाइटर जेट प्रोग्राम और मजबूत होगा।

देश के लिए यह सिर्फ एक इंजन नहीं, बल्कि सैन्य शक्ति और स्वाभिमान का प्रतीक भी है। Tejas जैसे जेट्स में यह इंजन स्थापित होने के बाद भारतीय वायु सेना की ताकत में नई उड़ान आएगी। साथ ही साथ भारत के पास खुद का जेट इंजन होगा।

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